
x
Punjab.पंजाब: पंजाब में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों ने नॉन-टीचिंग ड्यूटी पर उनकी तैनाती को लेकर प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें मुख्य रूप से पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए नियुक्त किया गया है, लेकिन नॉन-टीचिंग जिम्मेदारियों में लगाया जाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी और पेशेवर अधिकारों के खिलाफ है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, हाल के महीनों में कई शिक्षकों को स्कूल प्रशासन और सरकारी अधिकारियों द्वारा नॉन-टीचिंग ड्यूटी जैसे कि रिकॉर्ड प्रबंधन, परीक्षा सुपरविजन, सरकारी योजनाओं के लिए डेटा संग्रह और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे उनकी पढ़ाई और बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है।
संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस तैनाती नीति में बदलाव नहीं किया, तो शिक्षक विरोध में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को मुख्य कक्षा कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
एक वरिष्ठ शिक्षक ने बताया कि “हम नॉन-टीचिंग कार्यों के लिए नहीं बने हैं। हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाना है। अगर हमें लगातार गैर-शैक्षणिक कामों में लगाया जाता रहेगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।”
शिक्षक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि नॉन-टीचिंग ड्यूटी केवल उन कर्मचारियों को दी जाए, जो इस काम के लिए विशेष रूप से नियुक्त हैं। इसके साथ ही उन्होंने नॉन-टीचिंग ड्यूटी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानदंड बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय प्रशासन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नॉन-टीचिंग ड्यूटी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के सुचारु कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक संगठनों की बातों को ध्यान में रखते हुए इस नीति की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
शिक्षकों के विरोध के कारण कई स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों का प्रदर्शन न केवल उनके अधिकारों की रक्षा का संकेत है, बल्कि यह शिक्षा के गुणात्मक स्तर को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
फिलहाल, पंजाब के शिक्षक संगठनों ने प्रशासन के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी है और कहा है कि वे इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उनका उद्देश्य है कि शिक्षकों को मुख्य शैक्षणिक कार्यों पर फोकस करने का पूरा अवसर मिले और उन्हें नॉन-टीचिंग ड्यूटी में अनावश्यक रूप से तैनात न किया जाए।
इस विरोध के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब में शिक्षा और प्रशासन के बीच तालमेल बनाए रखना आवश्यक है ताकि शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
TagsPunjabटीचर विरोधनॉन-टीचिंग ड्यूटी पर तैनातीनाराजगीteacher protestdeploymenton non-teaching dutyresentmentजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





