पंजाब

अकाली-बीजेपी गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, AAP के बागियों से बढ़ी राजनीतिक चुनौती

Kiran
3 Nov 2026 11:16 AM IST
अकाली-बीजेपी गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, AAP के बागियों से बढ़ी राजनीतिक चुनौती
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आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन पूर्व नेताओं - कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा - के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं को लेकर स्थिति जटिल हो गई है। इन नए नेताओं का आना, दोनों पार्टियों के बीच सीट-बंटवारे के किसी भी संभावित समीकरण में आसानी से फिट नहीं बैठता है। हालांकि BJP और शिरोमणि अकाली दल (SAD) दोनों के नेताओं का कहना है कि गठबंधन पर कोई भी फैसला वरिष्ठ नेतृत्व ही लेगा, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि ज़मीनी स्तर पर मिल रहे राजनीतिक संकेत मिले-जुले और कभी-कभी भ्रमित करने वाले हैं।
अमृतसर उत्तर के पूर्व विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह का मामला विशेष रूप से ध्यान खींचने वाला है। SAD के सबसे कड़े आलोचकों में से एक रहे कुंवर ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी (sacrilege) की घटनाओं के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहित अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर बार-बार सवाल उठाए थे। पंजाब पुलिस में IG रहते हुए, उन्होंने बेअदबी की घटनाओं के दौरान पुलिस फायरिंग की जांच का नेतृत्व किया था। हालांकि, बाद में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस जांच को स्वीकार नहीं किया और इस पर कड़ी टिप्पणी की।
राजनीति में आने के बाद भी कुंवर ने बेअदबी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। वे अक्सर फरीदकोट जाते रहे और पुलिस फायरिंग से प्रभावित परिवारों से मिलते रहे, साथ ही उन्होंने बेअदबी मामलों की जांच की प्रगति पर असंतोष भी जताया। 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अमृतसर उत्तर से अकाली दल के वरिष्ठ नेता अनिल जोशी को हराया था। बाद में अनिल जोशी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। सनाउर और समाना के मौजूदा विधायक, पठानमाजरा और जौरामाजरा की स्थिति भी कुछ ऐसी ही अनिश्चित है। अकाली दल पहले ही समाना से जगमीत हरियाऊ को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका है। वहीं, SAD के सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह माना जाता है कि सनाउर सीट चंदूमाजरा परिवार के लिए छोड़ी गई है। हालांकि प्रेम सिंह चंदूमाजरा 'अकाली दल - पुनर सुरजीत' (Akali Dal - Punar Surjit) गुट के साथ हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा दी गई एकता की अपील का समर्थन किया था। सूत्रों के अनुसार, SAD ने सनाउर सीट उनके बेटे के लिए सुरक्षित रखी है। इस पृष्ठभूमि में, इन निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत आधार रखने वाले नेताओं के पार्टी में शामिल होने से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या भाजपा उन्हें उनके पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ाना चाहती है, और भविष्य में किसी गठबंधन के ढांचे में यह कदम कैसे फिट बैठेगा।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने, अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पार्टी में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें टिकट मिल ही जाएगा। उन्होंने कहा, "पार्टी में चुनाव लड़ने के अलावा भी कई जिम्मेदारियां होती हैं। भाजपा में शामिल होने वाले किसी व्यक्ति को केवल उम्मीदवार के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।"
इस नेता ने बताया कि भाजपा सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, या फिर SAD (शिरोमणि अकाली दल) और 'अकाली दल-पुनर्जीत' के साथ गठबंधन होने की स्थिति में, जितनी संभव हो उतनी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। वहीं, अकाली दल के सूत्रों का कहना है कि उन्हें 'पुनर्जीत' गुट के साथ फिर से जुड़ने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भाजपा के साथ कोई गठबंधन होता है, तो उसका आधार उम्मीदवारों के जीतने की संभावना और हर निर्वाचन क्षेत्र की जमीनी हकीकत ही होगी। अकाली दल के एक नेता ने कहा, "सीटों का बंटवारा तो एक बात है, लेकिन उम्मीदवारों की उपयुक्तता और उनके चुनाव जीतने की क्षमता को भी ध्यान में रखना होगा।"
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