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Amritsar अमृतसर। पंजाब में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताज़ा घटना अमृतसर ज़िले के बाबा बकाला कस्बे में देखने को मिली, जहां बुधवार को एक खेत में धान की पराली को जलाते हुए देखा गया। स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी, जिसके बाद पर्यावरण विभाग और कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आग बुझवाने के साथ ही खेत मालिक की पहचान कर उसे नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। जानकारी के अनुसार, बाबा बकाला इलाके में मंगलवार देर रात कुछ किसानों ने धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को जलाया। सुबह होते ही खेत से उठता धुआं आसपास के गांवों में फैल गया। इससे हवा में धुंध छा गई और स्थानीय लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। प्रशासन ने ड्रोन सर्वे के माध्यम से इस क्षेत्र में कई छोटे-बड़े पराली जलाने के स्थानों की पहचान की है।
जिला प्रशासन ने बताया कि पराली जलाना वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को गंभीर स्तर पर पहुंचा सकता है। बाबा बकाला क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। अमृतसर उपायुक्त ने कहा, “पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने प्रत्येक ब्लॉक में निगरानी टीम गठित की है, जो हर घटना पर तुरंत रिपोर्ट तैयार करेगी। इस बीच, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने अमृतसर जिले से संबंधित सभी ब्लॉकों से रिपोर्ट मांगी है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि धान की कटाई के बाद किसान जल्द गेहूं की बुवाई के लिए खेत साफ करने के उद्देश्य से पराली जलाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। राज्य सरकार ने किसानों को पराली प्रबंधन के लिए कई वैकल्पिक उपाय — जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर मशीन और मल्चर — उपलब्ध कराए हैं, ताकि खेतों में आग लगाने की ज़रूरत न पड़े।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब में अक्टूबर के मध्य से लेकर नवंबर तक पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। पिछले साल इसी अवधि में नासा के सैटेलाइट डेटा के अनुसार पंजाब में लगभग 49,000 फायर पॉइंट्स दर्ज किए गए थे, जिनमें से कई अमृतसर और तरनतारन ज़िले के थे। इस साल भी शुरुआती आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। स्थानीय किसान हरजीत सिंह ने बताया कि मशीनों का किराया बहुत अधिक है और सब्सिडी समय पर नहीं मिलती, जिस कारण किसान मजबूरी में पराली जलाने पर उतर आते हैं। उन्होंने कहा, “सरकार अगर वास्तव में रोक लगाना चाहती है, तो किसानों को वैकल्पिक मशीनें और सहायता समय पर उपलब्ध कराए।
राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि पराली जलाने वालों पर ₹2,500 से ₹15,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा और ग्राम पंचायतों को निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही, जिन गांवों में पराली नहीं जलाई जाएगी, उन्हें ‘ग्रीन ग्राम’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा। पराली जलाने की यह ताजा घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकार और प्रशासन अपने स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू कर पा रहे हैं या नहीं। वहीं, हवा में बढ़ता धुआं दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में सांस लेना मुश्किल कर सकता है।
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