पंजाब

मोगा में पराली जलाने के मामलों में 60% की कमी, पंजाब सरकार के प्रयासों से दिखा असर

SHIDDHANT
3 Nov 2025 8:14 PM IST
मोगा में पराली जलाने के मामलों में 60% की कमी, पंजाब सरकार के प्रयासों से दिखा असर
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Punjab पंजाब: राज्य में पराली जलाने की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए पंजाब सरकार के प्रयासों का असर अब मैदान पर साफ दिखाई देने लगा है। मोगा जिले में इस वर्ष पराली जलाने के मामलों में 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी डिप्टी कमिश्नर (डीसी) सागर सेतिया ने दी है। उन्होंने बताया कि प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है, जिससे जिले में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
डीसी सागर सेतिया ने कहा कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार किसानों ने पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाया है। सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन, मशीनरी की सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई है। किसानों को ‘हैप्पी सीडर’, ‘सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS)’ जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया है, जिससे खेतों में बिना पराली जलाए अगली फसल की बुआई संभव हो सकी है।
उन्होंने कहा कि जिले के कई गांवों में किसानों ने स्वेच्छा से पराली न जलाने की शपथ ली है। प्रशासन की ओर से ब्लॉक और पंचायत स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो निगरानी के साथ-साथ किसानों को पराली प्रबंधन के उपाय भी बता रही हैं। इसके अलावा, गांव-गांव जाकर जागरूकता रैलियां और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण बल्कि उनकी मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।
डीसी सागर सेतिया ने कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों के मुद्दों को समझते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए हैं। प्रशासन किसानों को पराली इकट्ठा करने, परिवहन करने और कम्पोस्ट या बायोमास के रूप में उपयोग करने के लिए भी मदद कर रहा है। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने ड्रोन सर्विलांस सिस्टम की मदद से उन इलाकों की निगरानी शुरू की है जहां पराली जलाने की आशंका रहती है।
उन्होंने बताया कि किसानों के सहयोग और प्रशासन की सख्त निगरानी के कारण पिछले वर्ष की तुलना में मोगा जिले में पराली जलाने की घटनाएं 60 प्रतिशत तक कम हो गई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और भी नीचे जाएगा, जिससे पंजाब को पराली प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त किया जा सकेगा।
सागर सेतिया ने कहा कि यह सफलता किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों और कृषि अधिकारियों की संयुक्त मेहनत का परिणाम है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार के सहयोग से पर्यावरण की रक्षा में भागीदार बनें और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और उपजाऊ धरती का संरक्षण करें।
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