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किसानों के दिल्ली मार्च से हलचल हरियाणा पंजाब सीमा पर सुरक्षा कड़ी

nidhi
17 Aug 2026 10:51 AM IST
किसानों के दिल्ली मार्च से हलचल हरियाणा पंजाब सीमा पर सुरक्षा कड़ी
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ट्रेड डील के विरोध में किसान सड़क पर दिल्ली कूच से बॉर्डर सील
चंडीगढ़ : भारत-अमेरिका की प्रस्तावित ट्रेड डील और किसानों की दूसरी लंबित मांगों को लेकर पंजाब के किसान एक बार फिर दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) से जुड़े किसानों की प्रस्तावित ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को हरियाणा पुलिस ने खनौरी-दाता सिंह वाला बॉर्डर पर रोक दिया है। किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने के लिए पांच स्तर की बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
किसानों ने 16 अगस्त से पंजाब के दाता सिंह वाला से दिल्ली के जंतर-मंतर तक करीब 228 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया था। योजना के अनुसार पहले जत्थे में 51 किसान पैदल दिल्ली की ओर बढ़ने वाले थे। यात्रा 29 अगस्त को दिल्ली पहुंचकर किसान पंचायत के साथ समाप्त करने की योजना है।
लेकिन किसानों के दिल्ली कूच से पहले ही हरियाणा प्रशासन ने खनौरी अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी। पुलिस ने कंक्रीट के ब्लॉक, कई स्तर के बैरिकेड, कंटीले तार, वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण वाहनों की व्यवस्था की है। आसपास के रास्तों पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। जींद के पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह के मुताबिक किसान संगठनों को इस पदयात्रा के लिए अनुमति नहीं मिली है। इसी आधार पर प्रशासन ने किसानों को हरियाणा में प्रवेश कर दिल्ली की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।
खनौरी बॉर्डर पर डटे किसान
हरियाणा पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण किसान फिलहाल खनौरी-दाता सिंह वाला सीमा पर डटे हुए हैं। रविवार को प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। रिपोर्ट के अनुसार जींद के उपायुक्त के साथ दो दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने बॉर्डर पर ही धरना जारी रखने का फैसला किया। किसानों ने सड़क किनारे अपना सामान रखकर वहीं पड़ाव डाल लिया है। प्रदर्शनकारी अपने साथ कई दिनों का राशन लेकर पहुंचे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि अगर प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं देता है तो आंदोलन लंबा खिंच सकता है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली की ओर जाने की अनुमति देने की अपील की है। किसान संगठनों का कहना है कि वे सीमित संख्या में शांतिपूर्ण पैदल मार्च करना चाहते हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध क्यों?
किसानों के इस आंदोलन के केंद्र में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता है। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत अभी जारी है और दोनों देश नियमित संपर्क में हैं। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि दोनों पक्ष प्रस्तावित समझौते पर बातचीत जारी रखे हुए हैं।
किसान संगठनों को आशंका है कि किसी व्यापार समझौते में भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक खोलने से देश के किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। उनका विरोध खास तौर पर कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में संभावित बाजार पहुंच को लेकर है। हालांकि प्रस्तावित समझौते की अंतिम शर्तें अभी तय नहीं हुई हैं। इसलिए किसानों की चिंताओं और अंतिम ट्रेड डील में होने वाले प्रावधानों के बीच अंतर रखना जरूरी है। समझौते का वास्तविक प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब बातचीत पूरी होगी और अंतिम शर्तें सार्वजनिक होंगी।
MSP की कानूनी गारंटी भी बड़ी मांग
आंदोलन केवल भारत-अमेरिका ट्रेड डील तक सीमित नहीं है। किसान सभी फसलों की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी की मांग भी उठा रहे हैं। खनौरी से दिल्ली तक प्रस्तावित पदयात्रा में ट्रेड डील के विरोध के साथ MSP की कानूनी गारंटी प्रमुख मांगों में शामिल है। किसान संगठन लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि MSP को कानूनी अधिकार बनाया जाए। उनका तर्क है कि केवल चुनिंदा फसलों की सरकारी खरीद किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।
पांच लेयर की बैरिकेडिंग
खनौरी बॉर्डर की तस्वीरें पिछले किसान आंदोलनों की याद दिला रही हैं। इस बार भी हरियाणा पुलिस ने सीमा पर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है। पांच स्तर की बैरिकेडिंग के साथ कंक्रीट ब्लॉक और कंटीले तार लगाए गए हैं। वाटर कैनन तथा दंगा नियंत्रण वाहन भी तैनात हैं। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी किसी भी स्थिति में हरियाणा की सीमा में प्रवेश कर दिल्ली की तरफ आगे न बढ़ सकें। यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा गया है और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब आंदोलनकारी शांतिपूर्ण पैदल यात्रा करना चाहते हैं तो उन्हें आगे बढ़ने से क्यों रोका जा रहा है।
आज बैठकों पर नजर
सोमवार को खनौरी बॉर्डर पर किसान संगठनों की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। किसान नेताओं और विभिन्न संगठनों के बीच आगे की रणनीति को लेकर बैठकें हो सकती हैं। प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर रख रहा है। रविवार की बातचीत में समाधान नहीं निकलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोमवार को प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच नए दौर की बातचीत से रास्ता निकलता है या नहीं। अगर किसान दिल्ली जाने पर अड़े रहते हैं और हरियाणा प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं देता है तो खनौरी बॉर्डर एक बार फिर लंबे किसान आंदोलन का केंद्र बन सकता है।
29 अगस्त को दिल्ली पहुंचने की योजना
किसानों के मूल कार्यक्रम के मुताबिक पदयात्रा को 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचना है। इसके बाद वहां किसान पंचायत आयोजित करने की योजना है। 51 किसानों के पहले जत्थे के जरिए आंदोलनकारी यह संदेश देना चाहते हैं कि उनका कार्यक्रम बड़े वाहनों या ट्रैक्टरों के काफिले के बजाय सीमित संख्या में पैदल दिल्ली पहुंचने का है। लेकिन हरियाणा प्रशासन का कहना है कि पदयात्रा के लिए आवश्यक अनुमति नहीं है। कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सीमा को सील कर रखा है।
किसान आंदोलन का पुराना केंद्र रहा है खनौरी
खनौरी बॉर्डर किसान आंदोलनों के दौरान पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित होने के कारण दिल्ली की ओर बढ़ने वाले किसान संगठनों के लिए यह महत्वपूर्ण रास्ता है। अब एक बार फिर इसी बॉर्डर पर किसानों और प्रशासन के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। किसानों ने फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं और सीमा पर अपना पड़ाव बनाए रखा है। दूसरी तरफ पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में ढील देने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है। इससे आने वाले दिनों में खनौरी बॉर्डर पर स्थिति आंदोलन की अगली दिशा तय कर सकती है।
ट्रेड डील पर किसान चाहते हैं स्पष्टता
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की प्रमुख मांग है कि कृषि क्षेत्र के हितों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए। उनका कहना है कि देश के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए ही किसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पर निर्णय होना चाहिए। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी रहने के कारण यह मुद्दा आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार की तरफ से अंतिम व्यापार समझौते की सभी शर्तें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र में क्या प्रावधान किए जाते हैं। फिलहाल किसान संगठन संभावित असर को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
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