
चंडीगढ़। नौ साल पुराने रिश्वत मामले में चंडीगढ़ की पूर्व एसडीएम और एचसीएस अधिकारी शिल्पी पात्तर के पति धीरज दत्त को सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने धीरज दत्त की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी है। इसके साथ ही अब इस मामले में उनकी पत्नी शिल्पी पात्तर के साथ-साथ धीरज दत्त के खिलाफ भी मुकदमा आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा प्रथमदृष्टया सामग्री मौजूद है, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
धीरज दत्त ने करीब दो महीने पहले खुद को निर्दोष बताते हुए विशेष सीबीआई अदालत में आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की थी। उनका कहना था कि मूल शिकायत और एफआईआर में उनका नाम नहीं था और उन पर रिश्वत मांगने का कोई सीधा आरोप नहीं लगाया गया था। उन्होंने इसी आधार पर अदालत से इस मुकदमे से मुक्त करने की मांग की थी।
सीबीआई की ओर से विशेष सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने इस अर्जी का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि धीरज दत्त की भूमिका जांच के दौरान सामने आई थी और मामले में उनकी भूमिका को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि शुरुआती शिकायत में उनका नाम नहीं था। सीबीआई ने यह भी कहा कि रिश्वत की कथित रकम की बरामदगी, हाथ धोने के नमूनों की रिपोर्ट और स्वतंत्र गवाहों के बयान उनके खिलाफ महत्वपूर्ण सामग्री हैं।
मामला अगस्त 2017 का है। उस समय शिल्पी पात्तर चंडीगढ़ में एसडीएम ईस्ट के पद पर तैनात थीं। पंचकूला निवासी तरसेम कुमार ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि सेक्टर-26 स्थित एक संपत्ति को सील किए जाने के बाद उसे दोबारा खुलवाने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के अनुसार शुरुआत में पांच लाख रुपये मांगे गए थे, लेकिन बाद में दो लाख रुपये में बात तय हुई।
सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद 5 अगस्त 2017 को ट्रैप कार्रवाई की थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक कथित रिश्वत की रकम में से 50 हजार रुपये धीरज दत्त के सेक्टर-27 स्थित घर से बरामद किए गए थे। सीबीआई का दावा है कि यह रकम उनके पहने हुए कपड़े की कमर के हिस्से में छिपाई गई थी। बरामद नोटों के नंबर ट्रैप से पहले दर्ज किए गए नोटों के नंबरों से मेल खाते थे।
सीबीआई ने अदालत के सामने यह भी कहा कि धीरज दत्त के हैंडवॉश सैंपल पॉजिटिव आए थे। अभियोजन पक्ष ने इन तथ्यों के आधार पर कहा कि आरोपी को कथित रिश्वत की मांग और रकम स्वीकार किए जाने की जानकारी थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता, स्वतंत्र गवाहों और ट्रैप टीम से जुड़े अधिकारियों के बयान भी जांच रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
विशेष सीबीआई जज भावना जैन ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय किए जाने या डिस्चार्ज अर्जी पर विचार करते समय अदालत को इस चरण पर पूरे सबूतों का अंतिम मूल्यांकन नहीं करना होता। अदालत को केवल यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं। इसी कसौटी पर धीरज दत्त की अर्जी खारिज कर दी गई।
अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित रिश्वत की रकम मिलने के बाद धीरज की प्रतिक्रिया और बरामदगी से जुड़ी परिस्थितियां प्रथमदृष्टया यह संकेत देती हैं कि उन्हें रिश्वत की कथित मांग और स्वीकार किए जाने की जानकारी थी। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि मामले को ट्रायल में आगे बढ़ना चाहिए।
इस मामले में शिल्पी पात्तर की कानूनी मुश्किलें भी पहले से जारी हैं। उन्होंने अपने खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दी गई अभियोजन मंजूरी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह मामला कई वर्षों तक लंबित रहा। हाल में हाईकोर्ट ने उनकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी और विशेष सीबीआई अदालत को लंबित मुकदमे का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए।
2017 के इस मामले में शिल्पी पात्तर के अलावा उनके पति धीरज दत्त और एक बिचौलिये जीएस बराड़ को भी आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बराड़ ने उसे तत्कालीन एसडीएम से मिलवाया और बाद में उसका काम कराने के बदले रकम की मांग की गई। सीबीआई ने इसके बाद ट्रैप बिछाकर कार्रवाई की थी।
धीरज दत्त की डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने के बाद अब उनके खिलाफ भी मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत में अभियोजन पक्ष अपने गवाह और दस्तावेज पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
यह मामला अब नौ साल पुराना हो चुका है और लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में लंबित था। हाईकोर्ट की ओर से मुकदमे को शीघ्र निपटाने के निर्देश और अब धीरज दत्त की डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने के बाद विशेष सीबीआई कोर्ट में सुनवाई तेज होने की संभावना है।
फिलहाल धीरज दत्त और शिल्पी पात्तर के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। मुकदमे का अंतिम फैसला गवाहों, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा। हालांकि डिस्चार्ज अर्जी खारिज होने से यह साफ हो गया है कि अदालत ने इस चरण पर धीरज दत्त के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त प्रथमदृष्टया आधार माना है।





