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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को कथित स्ट्रीट लाइट घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व OSD संदीप सिंह संधू को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ताओं की उस शिकायत पर भी ध्यान दिया कि आरोपों को लेकर पहले ही एक तरह की राय बना ली गई है, जिससे उनके बचाव के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।अदालत के आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं के संबंध में संबंधित FIR और उससे जुड़े आदेशों के तहत आगे की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य शिकायत यह है कि आरोपों के बारे में पहले से निष्कर्ष जैसा माहौल बना दिया गया है और इससे निष्पक्ष बचाव का उनका अधिकार प्रभावित हो सकता है।
यह मामला कथित तौर पर सरकारी धन से गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने से जुड़ा है। संदीप सिंह संधू के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अक्टूबर 2022 में मामला दर्ज किया था। उस समय आरोप लगाया गया था कि 26 गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए जारी लगभग 65 लाख रुपये के सरकारी अनुदान के इस्तेमाल में कथित अनियमितताएं हुईं। संधू इस मामले में पहले भी अदालत से राहत हासिल कर चुके हैं।संधू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका में जुड़े रहे हैं। मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे, लेकिन इन आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
बुधवार की सुनवाई में हाई कोर्ट ने विशेष रूप से इस पहलू पर गौर किया कि किसी भी आपराधिक या भ्रष्टाचार मामले में आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और प्रभावी बचाव का पूरा अवसर मिलना चाहिए। यदि जांच या प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान ऐसा प्रतीत हो कि आरोपों पर पहले ही अंतिम राय बना ली गई है, तो इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।अदालत ने अपने आदेश में इसी चिंता को दर्ज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मामले में पहले से धारणा बनाई गई है और इसका उनके बचाव के अधिकार पर गंभीर असर पड़ रहा है।
हाई कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर लगाई गई रोक का अर्थ फिलहाल यह है कि संबंधित FIR के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की प्रक्रिया अदालत के अगले आदेश तक आगे नहीं बढ़ेगी। हालांकि इसे मामले से आरोपमुक्त किए जाने या FIR रद्द किए जाने के समान नहीं माना जा सकता। मामला अदालत में विचाराधीन रहेगा और आगे दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर निर्णय होगा।स्ट्रीट लाइट मामले की शुरुआत पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की जांच से हुई थी। 2022 में दर्ज मामले में सरकारी अनुदान के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच एजेंसी का आरोप था कि गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए आवंटित धन के उपयोग में गड़बड़ी हुई। संदीप सिंह संधू समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की गई थी।
संधू ने अपने खिलाफ कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी। याचिका में जांच और संबंधित आदेशों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का मुद्दा उठाया गया। अब हाई कोर्ट ने इसी पहलू को देखते हुए आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया है।अदालत का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कार्रवाई करते समय निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता होती है। आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर होने के बावजूद अंतिम निष्कर्ष अदालत द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकाला जाता है।
कानूनी सिद्धांत के अनुसार किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होना या जांच चलना अपने आप में अपराध साबित होना नहीं माना जाता। अदालत में अभियोजन पक्ष को आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश करने होते हैं और आरोपी पक्ष को उन साक्ष्यों का जवाब देने तथा अपना बचाव रखने का अधिकार होता है।यही वजह है कि हाई कोर्ट की टिप्पणी में बचाव के अधिकार को प्रमुखता मिली है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील का संज्ञान लिया कि मामले में आरोपों को लेकर पूर्वधारणा बनने से उनकी स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांग सकती है और यह तय कर सकती है कि कार्यवाही पर लगी रोक आगे भी जारी रहेगी या नहीं। राज्य सरकार और जांच एजेंसी को भी अपने पक्ष और कार्रवाई के आधार को अदालत के सामने रखना होगा।इस बीच संदीप सिंह संधू को मिली राहत अस्थायी है और मामले का अंतिम फैसला अभी बाकी है। हाई कोर्ट ने फिलहाल केवल आगे की कार्यवाही को रोका है। इससे मूल आरोपों पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।पंजाब में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर हाल के समय में राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हैं और अदालतों में संबंधित साक्ष्यों तथा कानून के आधार पर ही निर्णय लिए जा रहे हैं।संदीप सिंह संधू से जुड़ा स्ट्रीट लाइट मामला भी अब एक बार फिर न्यायिक समीक्षा के केंद्र में आ गया है। हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक रहेगी।
अदालत की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया में आरोपी के बचाव के अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई को गंभीरता से देखा जा रहा है। मामले में अब अगली सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर नजर रहेगी।फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के इस आदेश से संदीप सिंह संधू को बड़ी अंतरिम राहत मिली है। स्ट्रीट लाइट घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही रोक दी गई है, जबकि मूल मामले की कानूनी जांच और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
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