पंजाब

SAD leader ने हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने पर आप सरकार की आलोचना की

Ratna Netam
26 April 2026 1:04 PM IST
SAD leader ने हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने पर आप सरकार की आलोचना की
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Punjab.पंजाब: शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर कड़ा हमला किया है, क्योंकि सरकार ने मशहूर क्रिकेटर और पंजाब के पूर्व खिलाड़ी हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया। शिअद नेता का कहना है कि यह कदम न केवल अनुचित है बल्कि पंजाब की कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, हरभजन सिंह को कुछ समय पहले राज्य सरकार की तरफ से
विशेष सुरक्षा प्रदान
की गई थी। लेकिन हाल ही में सुरक्षा वापस लेने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। शिअद नेता ने कहा कि हरभजन सिंह जैसे सम्मानित और समाज में प्रभावशाली व्यक्तित्व की सुरक्षा वापस लेना गलत संदेश देता है और आम जनता में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है।
शिअद नेता ने यह भी कहा कि यह कदम केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है, क्योंकि आप सरकार ने पिछले कुछ समय में कई बड़े निर्णय ऐसे लिए हैं, जिनसे विवाद बढ़ा है। उनका कहना है कि सुरक्षा मामलों को किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए और सरकार की जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति, विशेषकर सार्वजनिक हस्तियों, की सुरक्षा सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा वापसी का फैसला संवेदनशील विषय है। सुरक्षा हटाने के पीछे प्रशासनिक कारण हो सकते हैं, लेकिन यदि यह निर्णय बिना पर्याप्त कारण और सार्वजनिक समझ के लिया जाए, तो इसके गंभीर राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह जैसे सार्वजनिक व्यक्ति की सुरक्षा पर किसी भी तरह की कमी गंभीर चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर स्थानीय जनता और खेल प्रेमियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार के फैसले की आलोचना की और कहा कि यह निर्णय न केवल असंवेदनशील है बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा नीतियों पर भी सवाल उठाता है। आप सरकार ने अब तक इस कदम के पीछे की औपचारिक वजहों के बारे में कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि कुछ सूत्रों ने बताया कि प्रशासन ने सुरक्षा हटाने का निर्णय व्यापक समीक्षा के बाद लिया है। लेकिन शिअद नेताओं का कहना है कि यह समीक्षा पारदर्शी और जनता के सामने होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या गलत संदेश न जाए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आगामी चुनाव और राजनीतिक रुझानों पर भी असर डाल सकता है। सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अक्सर जनता के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं, और इसे राजनीतिक विरोधियों द्वारा भी भुनाया जा सकता है।
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