पंजाब

24 लाख के घोटाले का खुलासा, 6 अधिकारियों समेत 9 पर केस दर्ज

Kiran
25 Oct 2026 12:46 PM IST
24 लाख के घोटाले का खुलासा, 6 अधिकारियों समेत 9 पर केस दर्ज
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विजिलेंस ब्यूरो (VB) ने फरीदकोट में जल आपूर्ति और स्वच्छता (WSS) विभाग के छह अधिकारियों और तीन निजी ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर शहरी जल आपूर्ति के रखरखाव के लिए आवंटित फंड से 24.34 लाख रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है।
आरोपी अधिकारियों में कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) जसविंदर सिंह, उप-विभागीय अभियंता (Sub-Divisional Engineer) संदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer) परविंदर सिंह, वरिष्ठ सहायक जसमीत सिंह और तारा सिंह, तथा डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह शामिल हैं। जिन ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह शामिल हैं।
FIR में 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' (Prevention of Corruption Act, 1988) और 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की उन धाराओं को शामिल किया गया है, जो आपराधिक साजिश, जालसाजी और विश्वासघात से संबंधित हैं। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। FIR के अनुसार, विभागीय जांच में पता चला है कि ऐसे कामों के लिए फर्जी दस्तावेज और बिल तैयार किए गए, जो कभी हुए ही नहीं थे। राज्य सरकार ने 23 अक्टूबर 2024 को शहर की जल आपूर्ति योजना के लिए 73.56 लाख रुपये जारी किए थे, जिसमें से 24.34 लाख रुपये की हेराफेरी की गई।
अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) नरिंदर सिंह द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई विस्तृत जांच में 25 अक्टूबर 2024 को नियमों के उल्लंघन का पता चला। आरोप है कि संदीप सिंह ने बिना जरूरी डिमांड रिपोर्ट, कनिष्ठ अभियंता के प्रस्तावों या ड्राइंग शाखा के एस्टीमेट (अनुमान) के, सात कामों के लिए कोटेशन जारी किए। हर काम की अनुमानित लागत 49,900 रुपये बताई गई थी। FIR में आरोप है कि कार्यकारी अभियंता (XEN) जसविंदर सिंह ने बिना अनिवार्य तुलनात्मक विवरण (comparative statements) और मिलान (reconciliation) के इन कामों को मंजूरी दे दी। बाद में, हर काम के एस्टीमेट को बढ़ाकर लगभग 5 लाख रुपये कर दिया गया। इन बढ़ी हुई लागतों को मंजूरी देने वाले दस्तावेजों पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सुखपिंदर सिंह के फर्जी हस्ताक्षर थे, जिन्हें वरिष्ठ सहायक जसमीत सिंह के माध्यम से जारी किया गया था।
दस्तावेजों में दिखाया गया कि ये काम एक ही सप्ताहांत (weekend) में शुरू हुए और पूरे भी हो गए। बिलों पर न तो ठेकेदारों के हस्ताक्षर थे और न ही कोई डिस्पैच नंबर था। वहीं, कनिष्ठ अभियंता (JE) परविंदर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना साइट का निरीक्षण किए ही गलत माप (measurements) दर्ज कर दिए। डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह और वरिष्ठ सहायक तारा सिंह पर आरोप है कि उन्होंने नियमों के उल्लंघन के बावजूद इन बिलों को पास कर दिया। 29 अक्टूबर तक ठेकेदारों के बैंक खातों में भुगतान ट्रांसफर कर दिए गए थे। सत्यापन के दौरान, ठेकेदारों हरदीप सिंह और करनैल सिंह ने कथित तौर पर पुष्टि की कि साइटों पर कोई काम नहीं हुआ था। ब्यूरो मुख्यालय और रेंज अधिकारियों के निर्देशों के बाद, VB की फरीदकोट इकाई के DSP विनोद कुमार इस मामले की जांच कर रहे हैं।
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