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Amritsar मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य, फिर भी सामाजिक कलंक और जागरूकता की कमी के कारण अक्सर इसकी अनदेखी कर दी जाती है। तनाव, काम का दबाव, आर्थिक कठिनाइयाँ, रिश्तों से जुड़ी समस्याएँ और बदलती जीवनशैली के कारण लोगों के लिए अच्छे मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग हर सात में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। भारत में, लगभग हर 10 वयस्कों में से एक को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ होती हैं, जबकि लगभग 85 प्रतिशत लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पाता है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ किसी व्यक्ति की भावनाओं, विचारों, व्यवहार, नींद, रिश्तों और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। ये पारिवारिक जीवन में बाधा डाल सकती हैं, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर असर डाल सकती हैं, कार्यक्षमता को कम कर सकती हैं और देखभाल करने वालों के लिए भावनात्मक व आर्थिक तनाव पैदा कर सकती हैं। समय रहते पहचान और सही इलाज से जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है और लोग एक बेहतर व संतोषजनक जीवन जी सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ कमजोरी या व्यक्तिगत विफलता की निशानी नहीं हैं। ये किसी को भी हो सकती हैं और इनके पीछे जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का मिला-जुला असर हो सकता है। अक्सर, लोगों को इस बात का डर होता है कि दूसरे उनके बारे में क्या सोचेंगे, और इसी डर की वजह से वे पेशेवर मदद लेने से कतराते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी उतनी ही देखभाल, समझ और इलाज की जरूरत होती है, जितनी कि शारीरिक बीमारियों के लिए। एक ऐसा माहौल बनाना बहुत जरूरी है जहाँ लोग बिना किसी भेदभाव के डर के, खुलकर अपनी भावनात्मक परेशानियों के बारे में बात कर सकें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ आम समस्याओं में डिप्रेशन (अवसाद), तनाव और एंग्जायटी डिसऑर्डर (घबराहट संबंधी विकार), बाइपोलर डिसऑर्डर और अन्य मूड डिसऑर्डर, ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), सिज़ोफ्रेनिया और अन्य विकार शामिल हैं। लेख: डॉ. आकाशदीप सिंह, MD (मनोरोग विशेषज्ञ), शेरगिल मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल, अमृतसर
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