पंजाब

पंजाब में फर्जी जमानतदारों के रैकेट का भंडाफोड़, मोगा और फरीदकोट में जांच तेज

Kiran
28 Oct 2026 11:26 AM IST
पंजाब में फर्जी जमानतदारों के रैकेट का भंडाफोड़, मोगा और फरीदकोट में जांच तेज
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Punjab मोगा CIA स्टाफ को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जिससे न्यायिक प्रणाली का फायदा उठाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह फर्जी पहचान पत्र और संपत्ति के दस्तावेज तैयार करता था, ताकि शातिर अपराधी 'फर्जी जमानतदारों' (ghost sureties) के जरिए जमानत हासिल कर सकें। इस गिरोह का खुलासा मोगा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (Judicial Magistrate Ist Class) की अदालत से मिली एक आधिकारिक सूचना के बाद हुआ। पुलिस थाना दक्षिण मोगा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज एक मामले की जांच से पता चला कि जसप्रीत सिंह (उर्फ ज़ैद ब्लैक) नाम का एक व्यक्ति, जो फिलहाल जेल में बंद है, वहीं से बैठकर इस फर्जी जमानत रैकेट को चला रहा था।
पुलिस के अनुसार, जसप्रीत सिंह की पत्नी अनुजा ने दो अज्ञात साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान पत्र और संपत्ति के दस्तावेज तैयार किए। इस गिरोह ने झंडेआना गढ़ी गांव के लछमन सिंह के बेटे जरनैल सिंह के नाम पर एक फर्जी आधार कार्ड, और हरजिंदर सिंह के नाम पर पंचायत सदस्य का एक जाली कार्ड बनाया। इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अदालत में आरोपियों को अंतरिम राहत और जमानत दिलाने के लिए किया गया था।
मोगा का यह गिरोह उस बढ़ते चलन को दर्शाता है, जिसके तहत इस क्षेत्र की जिला अदालतों में फर्जी जमानत रैकेट सक्रिय हैं। हाल ही में फरीदकोट में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां एक आरोपी ने माचकी कलां गांव के एक मृत ज़मीन मालिक के पहचान पत्र और संपत्ति के दस्तावेज जमा करके जमानत हासिल कर ली थी। उस मामले में, गिरोह के साथियों ने जमानतदार बनकर अदालत में झूठी गवाही दी थी, लेकिन बाद में जमानत के बाद सत्यापन (verification) के दौरान इस धोखाधड़ी का पता चल गया।
इस तरह के गिरोह आमतौर पर जमानत प्रक्रिया का फायदा उठाते हैं। वे फर्जी आधार कार्ड, जाली पंचायत सदस्य पहचान पत्र और संपत्ति के फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके आपराधिक गिरोह के सदस्यों के लिए 'फर्जी जमानतदार' (ghost sureties) के रूप में काम करते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि ये गिरोह न्यायिक जांच से बचने के लिए अक्सर हर मामले में मोटी रकम वसूलते हैं।
इससे पहले, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद फरीदकोट पुलिस ने ऐसे ही गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि कैसे फर्जी संपत्ति और पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके अदालती प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिशें की जा रही थीं। मोगा पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की जा रही है, ताकि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके और फर्जी जमानत नेटवर्क से फायदा उठाने वाले अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
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