पंजाब

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के सेल्फी पॉइंट पर हॉकी स्टिक की गलती से उठे सवाल

Kiran
28 Oct 2026 11:52 AM IST
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के सेल्फी पॉइंट पर हॉकी स्टिक की गलती से उठे सवाल
x
जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में - जहाँ 9वीं एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लीग मैच खेले जा रहे हैं - हॉकी-थीम वाले एक सेल्फी-पॉइंट में एक बड़ी तकनीकी गलती सामने आई है। इस गलती ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए तैयार की गई प्रचार सामग्री (पब्लिसिटी मटेरियल) की जांच-परख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिस्प्ले में एक हॉकी स्टिक को गेंद पर उसके गोल पिछले हिस्से से प्रहार करते हुए दिखाया गया है, जो कि हॉकी के नियमों के अनुसार एक फाउल है, जिसे 'बैक-स्टिक फाउल' कहा जाता है। प्रचार से जुड़े अन्य डिज़ाइनों में भी ऐसी ही गलतियां देखने को मिली हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इन सामग्रियों को मंजूरी देने से पहले किसी तकनीकी विशेषज्ञ से सलाह ली गई थी या नहीं।
विश्वविद्यालय स्तर के पूर्व हॉकी खिलाड़ी, कर्नल जसजीत सिंह (रिटायर्ड) ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन की प्रचार सामग्री में खेल को बिल्कुल सही ढंग से दिखाया जाना चाहिए। एक ग्राफ़िक डिज़ाइनर को ये छोटी-छोटी बातें शायद अहम न लगें, लेकिन जिसने भी हॉकी खेली है, उसकी नज़र तुरंत इन गलतियों पर पड़ जाएगी।" पद्म श्री से सम्मानित और अनुभवी हॉकी कोच बलदेव सिंह ने सवाल उठाया कि क्या डिज़ाइन को मंजूरी देने से पहले किसी अनुभवी खिलाड़ी या कोच ने इसे देखा था। उन्होंने कहा कि अगर खेल की समझ रखने वाले किसी व्यक्ति ने भी इसे थोड़ा ध्यान से देखा होता, तो यह गलती होने से रोकी जा सकती थी। ओलंपियन हरदीप सिंह ग्रेवाल ने कहा, "खिलाड़ी सही ग्रिप, तकनीक और स्टिक के इस्तेमाल को सीखने में सालों लगा देते हैं। किसी आधिकारिक पोस्टर में खेल को गलत तरीके से दिखाना काफी शर्मनाक है। अगर कोई खिलाड़ी या कोच इसे एक बार भी देख लेता, तो ऐसी गलतियों से बचा जा सकता था।"
इस विवाद ने सरकारी प्रचार सामग्री को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खिलाड़ियों का मानना ​​है कि प्रचार सामग्री को डिज़ाइन करते समय और उसकी जांच-परख में अनुभवी खिलाड़ियों, कोचों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने से ऐसी गलतियों को रोका जा सकता है। उनका कहना है कि आधिकारिक प्रचार सामग्री केवल किसी आयोजन का विज्ञापन ही नहीं करती, बल्कि यह उस खेल, उसकी परंपराओं और आयोजन करने वाली संस्था के मानकों को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य की हॉकी की विरासत इतनी मजबूत हो, वहाँ खेल को बिल्कुल सही तरीके से दिखाना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
Next Story