पंजाब

चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज पर सवाल: 64 वेंटिलेटर बंद, मरीजों की सांसों पर संकट

Saba Naaz
24 July 2026 5:15 PM IST
चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज पर सवाल: 64 वेंटिलेटर बंद, मरीजों की सांसों पर संकट
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पंजाब: कोरोना महामारी के संकट काल में मरीजों की सांसे बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ के अस्पतालों को मुहैया कराए गए जीवनरक्षक उपकरणों की मौजूदा स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में कोविड-19 दौर में मिले 99 वेंटिलेटरों में से वर्तमान में 64 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं और गैर-कार्यशील (अक्रियाशील) पड़े हैं। इस प्रकार करीब दो-तिहाई वेंटिलेटरों का इस्तेमाल से बाहर होना अस्पताल की क्रिटिकल केयर व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।

यह चिंताजनक और चौंकाने वाला खुलासा देश की संसद में हुआ। लोकसभा में शुक्रवार को चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए एक तीखे सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने यह आधिकारिक जानकारी दी। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जीएमसीएच सेक्टर-32 को महामारी के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कुल 99 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन उनमें से केवल 35 वेंटिलेटर ही इस समय चालू स्थिति में हैं और मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो पा रहे हैं।

संसद सत्र के दौरान सांसद मनीष तिवारी ने केवल वेंटिलेटरों की स्थिति पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि उन्होंने चंडीगढ़ के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए कई अन्य गंभीर मुद्दे भी सदन के सामने रखे। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर में जरूरी तकनीकी स्टाफ की कमी, वेंटिलेटर तकनीशियनों की पर्याप्त उपलब्धता न होना, जीएमएसएच-16 (गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल) में चिकित्सा संसाधनों की कमी और अस्पतालों में नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की किल्लत जैसे अहम सवालों पर सरकार से जवाब मांगा।

मनीष तिवारी के इन सवालों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 दोनों ही बड़े अस्पतालों में फिलहाल नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों, मशीनों और वेंटिलेटरों के समय पर उचित रखरखाव (मेंटेनेंस) तथा मरम्मत के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन के इन दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है। पीएम केयर्स फंड व अन्य योजनाओं के तहत मिले 99 में से 64 वेंटिलेटरों का उपयोग में न आ पाना स्वास्थ्य प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों और शहर के लोगों का मानना है कि तकनीशियन और रखरखाव के अभाव में अगर जीवनरक्षक उपकरण बंद पड़े रहते हैं, तो इसका सीधा असर आपातकालीन स्थिति में आने वाले गंभीर मरीजों के इलाज पर पड़ता है। ऐसे में संसद में मुद्दा उठने के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इन वेंटिलेटरों को दोबारा शुरू कराने के लिए कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।

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