पंजाब
Punjab: शिवालिक पहाड़ियों में 15 वर्षों से जल आपूर्ति कर रहा रोपड़
Ratna Netam
4 May 2026 12:36 PM IST

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Punjab.पंजाब: पिछले 15 वर्षों से रोपड़ का जल शिवालिक पहाड़ियों के जंगलों में वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के प्रयासों के चलते रोपड़ के जल स्रोतों से वन्यजीवों को नियमित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे जंगलों में जीव-जंतुओं की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि रोपड़ का जल विशेष रूप से गर्मियों में पहाड़ियों के जंगलों में रहने वाले हिरण, तेंदुआ, भालू और कई प्रकार के पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है। यह जल स्रोत उनके लिए पीने के पानी के साथ-साथ प्राकृतिक आवास को भी सुरक्षित बनाए रखने में मदद करता है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में रोपड़ जल स्रोतों की देखरेख और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। जलाशयों, छोटे तालाबों और प्राकृतिक नदियों को नियमित रूप से साफ और संरक्षित किया गया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि वन्यजीवों को हर समय सुरक्षित और स्वच्छ पानी उपलब्ध रहे। स्थानीय निवासी भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे वन्यजीवों का पलायन कम हुआ है और गांवों के नजदीक जानवरों के आने की घटनाओं में भी कमी आई है। उन्होंने कहा, “पिछले वर्षों में हमने देखा है कि रोपड़ जल के कारण जंगल में वन्यजीवों की संख्या स्थिर और स्वस्थ बनी हुई है। यह हमारी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।”
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणविदों का मानना है कि पानी का यह स्रोत वन्यजीवों के जीवन चक्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जल की कमी से वन्यजीवों की मृत्यु दर बढ़ सकती है और उनके प्राकृतिक आवास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। रोपड़ जल स्रोत इस खतरे को काफी हद तक कम कर रहा है। वन विभाग ने बताया कि आगामी वर्षों में भी रोपड़ के जल स्रोतों का संरक्षण और विस्तार किया जाएगा। इसके लिए विशेष परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें तालाबों की मरम्मत, जल संचयन तकनीक और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित पानी की व्यवस्था शामिल है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह पहल न केवल वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय जलवायु, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल जंगल हरे-भरे रहेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रेरणा मिलेगी।
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