
Punjab.पंजाब: पंजाब में कृषि और बिजली क्षेत्र को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि राज्य की मौजूदा बिजली सब्सिडी नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है और किसानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग जैसे वैकल्पिक मॉडल अपनाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, मुफ्त या भारी सब्सिडी वाली बिजली से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इससे न सिर्फ सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है, बल्कि बिजली के अंधाधुंध इस्तेमाल से भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसानों को टिकाऊ खेती की ओर ले जाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे किसानों को पहले से तय कीमत, बाजार की गारंटी और तकनीकी सहयोग मिल सकता है, जिससे उनकी आय में स्थिरता आएगी। हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि उन्हें किसी तरह का नुकसान न हो। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि पंजाब को अपनी मौजूदा नीतियों में बदलाव करते हुए एक संतुलित और टिकाऊ कृषि मॉडल की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें सब्सिडी के बोझ को कम करते हुए किसानों की आय और संसाधनों का संरक्षण दोनों सुनिश्चित किया जा सके।





