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चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में गुरुवार को कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कथित तौर पर “इस्तेमाल करो और फेंको” की राजनीति करने का आरोप लगाया, जिसके बाद लुधियाना से कांग्रेस सांसद राजा वडिंग ने पलटवार करते हुए खुद को पार्टी का वफादार नेता बताया और बिट्टू पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया।
यह बयानबाजी ऐसे समय हुई है जब राजा वडिंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है। गुरुवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में भी बदलाव करते हुए खुद को पंजाब कांग्रेस का पूर्व अध्यक्ष बताया। वडिंग लुधियाना से लोकसभा सांसद बने हुए हैं। उन्होंने करीब साढ़े चार साल तक पंजाब कांग्रेस की कमान संभाली।
राजा वडिंग के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने की खबर सामने आने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लिया। बिट्टू ने इसे राहुल गांधी की कथित “use and throw policy” से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए।
इसके बाद राजा वडिंग ने बिट्टू को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह वफादार हैं, मौकापरस्त नहीं। वडिंग ने साफ किया कि संगठन में पद मिलना या पद से हटना उनके लिए पार्टी और नेतृत्व के प्रति निष्ठा से बड़ा मुद्दा नहीं है।
वडिंग ने सोशल मीडिया पर बिट्टू को संबोधित करते हुए लिखा कि वह गलत व्यक्ति से उलझ रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी को अपना नेता बताते हुए कहा कि उनका राहुल गांधी के प्रति भरोसा और राजनीतिक संबंध किसी पद पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में उन्हें लंबे समय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलीं और वह आगे भी पार्टी के साथ काम करते रहेंगे।
राजा वडिंग का राहुल गांधी के साथ राजनीतिक जुड़ाव पुराना रहा है। उन्होंने यूथ कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में पंजाब की राजनीति में आगे बढ़े। अप्रैल 2022 में उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लुधियाना सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था।
दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना में वडिंग का मुकाबला रवनीत सिंह बिट्टू से ही हुआ था। बिट्टू कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए थे और BJP ने उन्हें लुधियाना से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में वडिंग ने बिट्टू को हराकर यह सीट कांग्रेस के खाते में डाली थी।
रवनीत सिंह बिट्टू का भी कांग्रेस के साथ लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। वह कांग्रेस के टिकट पर तीन बार लोकसभा पहुंचे थे। उन्होंने 2009 में आनंदपुर साहिब से और बाद में लुधियाना से चुनाव जीते। मार्च 2024 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थाम लिया था। वडिंग इससे पहले भी बिट्टू के पार्टी बदलने को “राजनीतिक मौकापरस्ती” बता चुके हैं।
दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव नया नहीं है। फरवरी 2026 में संसद परिसर में राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद भी राजा वडिंग ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए बिट्टू पर निशाना साधा था। उस समय वडिंग ने कहा था कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने बिट्टू को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने के कई अवसर दिए। उन्होंने बिट्टू को याद दिलाया था कि कांग्रेस के साथ रहते हुए उन्हें लगातार चुनाव लड़ने और जिम्मेदारियां संभालने का मौका मिला।
अब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बीच दोनों नेताओं का पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने वडिंग की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू की है। संगठन में बदलाव की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी और राज्य इकाई में गुटबाजी तथा अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नए सिरे से तैयार करने को इसकी पृष्ठभूमि बताया जा रहा है।
वडिंग ने गुरुवार को दिल्ली रवाना होते समय भी कहा कि उन्हें कई सवालों के जवाब देने हैं और जल्द ही स्थिति पर अधिक स्पष्टता के साथ अपनी बात रखेंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के फैसले को लेकर तत्काल कोई सार्वजनिक नाराजगी जाहिर नहीं की।
वहीं बिट्टू की टिप्पणी ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है। BJP की ओर से इस घटनाक्रम को कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि कांग्रेस नेता इसे संगठन की आंतरिक प्रक्रिया बता रहे हैं।
राजा वडिंग ने अपने जवाब में मुख्य रूप से पार्टी के प्रति वफादारी पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने के बावजूद राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनकी निष्ठा में कोई बदलाव नहीं आया है। उनके समर्थकों का भी कहना है कि संगठन में जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं और किसी नेता की राजनीतिक भूमिका केवल एक पद से तय नहीं होती।
दूसरी ओर बिट्टू पहले भी कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद से वह राहुल गांधी और पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं पर लगातार राजनीतिक हमले करते रहे हैं। वडिंग और बिट्टू के बीच बयानबाजी में उनके पुराने राजनीतिक रिश्ते और लुधियाना की प्रतिद्वंद्विता भी बार-बार सामने आती रही है।
फिलहाल पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष के नाम पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। वडिंग के पद छोड़ने और बिट्टू की टिप्पणी के बाद शुरू हुई जुबानी जंग ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ बिट्टू कांग्रेस नेतृत्व पर “इस्तेमाल करो और फेंको” की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजा वडिंग ने खुद को कांग्रेस और राहुल गांधी के प्रति वफादार बताते हुए साफ कर दिया है कि उनका राजनीतिक संबंध पद मिलने या छिनने से तय नहीं होता।
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