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Punjab 32 वर्षीय DSP गगनदीप (नाम बदला हुआ है) अब यह सुनिश्चित करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हैं कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामले कानूनी जांच में टिक सकें और दोषियों को कानून के तहत सजा मिल सके। पहले, जब जूनियर अधिकारी इन मामलों को संभालते थे, तो कभी-कभी प्रक्रियात्मक कमियां रह जाती थीं, जिससे जांच के मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हुई।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'द ट्रिब्यून' को बताया कि चूंकि राज्य पुलिस हर दिन नशीले पदार्थों से जुड़े सैकड़ों मामलों को संभालती है, इसलिए जांच कौशल को मजबूत करना बहुत जरूरी था। अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रशिक्षण से अधिकारियों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की अधिक पेशेवर तरीके से जांच करने और कानूनी कार्यवाही के बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
पंजाब पुलिस के 971 अधिकारियों ने - जिनमें पुलिस अधीक्षक (SP) से लेकर सहायक उप-निरीक्षक (ASI) तक शामिल हैं - पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (RGNUL) में एक साल का 'सर्टिफाइड इन्वेस्टिगेटर कोर्स (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस)' पूरा किया है। इस पहल का उद्देश्य जांचकर्ताओं का एक ऐसा विशेष कैडर तैयार करना है, जो गहन जांच करने और कानूनी रूप से मजबूत मामले तैयार करने में सक्षम हो। RGNUL में कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. अभिनंदन बस्सी ने बताया कि एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से चलाई गई इस पहल ने जांच के मानकों, प्रक्रियात्मक नियमों के पालन और नशीले पदार्थों से जुड़े मुकदमों की गुणवत्ता को मजबूत किया है। प्रक्रियात्मक समझ को बेहतर बनाने के लिए, ANTF, कानूनी विशेषज्ञों और RGNUL के सहयोग से जांच अधिकारियों के लिए एक NDPS हैंडबुक भी तैयार की गई है।
इस कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों, पुलिस अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रजत बंसल ने ट्रायल से पहले की प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं और जांच क्षमता पर बात की, जबकि डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मनीत दुग्गल ने तलाशी और जब्ती, NDPS नियमों और प्रक्रिया की बारीकियों पर चर्चा की। वकील सुमीत सेखों ने इस कानून के मुख्य प्रावधानों और वित्तीय जांच के बारे में जानकारी दी। तकनीकी सत्रों में डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन और गिरफ्तारी की प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई। RGNUL की PhD स्कॉलर सुमन ने महत्वपूर्ण अदालती फैसलों और उनके कानूनी महत्व का विश्लेषण किया। क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. तवलीन कौर और डॉ. शेरैन रतन ने नशा, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के ढांचे पर चर्चा की।
RGNUL के कुलपति (वाइस-चांसलर) प्रो. जय शंकर सिंह ने प्रशासनिक समन्वय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने बताया कि 365 दिनों के इस कार्यक्रम ने जांचकर्ताओं का एक ऐसा कैडर तैयार करने में मदद की है, जो पेशेवर रूप से पूरी तरह सक्षम है। कोर्स पूरा करने वाले अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से उनकी पेशेवर क्षमता मजबूत हुई है, जवाबदेही को बढ़ावा मिला है और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के मामलों में साक्ष्य-आधारित कार्रवाई करने में मदद मिली है।
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