पंजाब
Punjab: डिग्री के बावजूद नौकरी की गारंटी नहीं, युवाओं में चिंता बढ़ी
Ratna Netam
18 April 2026 2:32 PM IST

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Punjab.पंजाब: उत्तर भारत के दो प्रमुख राज्यों Punjab और Haryana में बेरोज़गारी को लेकर सामने आए ताज़ा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों राज्यों में बेरोज़गारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है, जिससे युवाओं के बीच नौकरी को लेकर असुरक्षा और निराशा का माहौल बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा स्तर बढ़ने के बावजूद रोजगार के अवसर उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारी युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। स्थिति यह है कि केवल डिग्री होना अब रोजगार की गारंटी नहीं रह गया है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बढ़ती बेरोज़गारी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें उद्योगों की धीमी वृद्धि, कौशल और रोजगार बाजार के बीच असंतुलन, और सरकारी व निजी क्षेत्र में सीमित भर्ती प्रमुख हैं। इसके अलावा तकनीकी बदलाव और ऑटोमेशन ने भी पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित किया है।
Punjab में खासकर युवाओं की बड़ी आबादी नौकरी की तलाश में है, लेकिन अवसरों की कमी के कारण प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। कई युवाओं का कहना है कि उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन उसके अनुरूप नौकरी नहीं मिल पा रही है। यही स्थिति Haryana में भी देखने को मिल रही है, जहां शिक्षित बेरोज़गारों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल (स्किल्स) सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। आईटी, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं, लेकिन अधिकांश युवा इन नए कौशलों से अभी भी दूर हैं।
सरकारी स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनका प्रभाव ज़मीनी स्तर पर सीमित नजर आ रहा है। युवाओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और सीमित पदों के कारण स्थिति और कठिन हो गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि शिक्षा प्रणाली को रोजगार आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिल सके। इसके अलावा उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल, स्थिति यह है कि Punjab और Haryana में बेरोज़गारी एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुकी है। यह न केवल युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि राज्यों की आर्थिक प्रगति पर भी असर डाल रही है।
आने वाले समय में यदि रोजगार सृजन और कौशल विकास पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। फिलहाल, युवाओं की निगाहें सरकार और निजी क्षेत्र की नई नीतियों और अवसरों पर टिकी हुई हैं।
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