पंजाब
Punjab: मार्कफेड के तीखे तेवर, आंगनवाड़ियों को राशन सप्लाई देने से किया इनकार
Ratna Netam
30 April 2026 12:58 PM IST

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Punjab.पंजाब: पंजाब में सरकारी राशन वितरण प्रणाली और गुणवत्ता मानकों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक गतिरोध उत्पन्न हो गया है। राज्य की प्रतिष्ठित सहकारी संस्था मार्कफेड ने गुणवत्ता से जुड़े विवादों के चलते आंगनवाड़ी केंद्रों को राशन की आपूर्ति करने से स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया है। इस फैसले ने राज्य के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि इससे लाखों बच्चों और महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार की निरंतरता पर ब्रेक लग गया है। मार्कफेड का यह कड़ा रुख उस समय सामने आया है जब विभाग और संस्था के बीच पिछले काफी समय से सप्लाई किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के मानकों को लेकर तनातनी चल रही थी।
विवाद की जड़ में वह शिकायतें हैं जो समय-समय पर आंगनवाड़ी केंद्रों और लाभार्थी परिवारों की ओर से प्राप्त हो रही थीं। विभाग के कुछ हलकों में यह दावा किया गया था कि मार्कफेड द्वारा सप्लाई किए जा रहे बेसन, सोयाबीन और पंजीरी जैसे उत्पादों की गुणवत्ता तय मापदंडों के अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर, मार्कफेड प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे तकनीकी और प्रक्रियात्मक खींचतान करार दिया है। मार्कफेड का कहना है कि उनकी प्रयोगशालाओं में सख्त जांच के बाद ही माल बाहर भेजा जाता है, लेकिन विभाग द्वारा बार-बार सैंपलिंग के नाम पर खेप को रोकना और भुगतान में देरी करना संस्था के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। मार्कफेड ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यदि गुणवत्ता पर बार-बार सवाल उठाए जाएंगे और व्यावसायिक शर्तों का उल्लंघन होगा, तो वे आपूर्ति जारी रखने में असमर्थ हैं।
इस सप्लाई ठप होने का सबसे सीधा और दुखद प्रभाव पंजाब के हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों पर पड़ रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से छह महीने से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण आहार प्रदान किया जाता है। मार्कफेड की ओर से हाथ खींच लेने के कारण कई जिलों में राशन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है कि यदि अगले कुछ दिनों में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई या मार्कफेड के साथ विवाद नहीं सुलझा, तो लाभार्थियों को खाली हाथ वापस भेजना पड़ेगा। यह स्थिति राज्य सरकार के कुपोषण मुक्त पंजाब के अभियान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस गतिरोध को तोड़ने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों और मार्कफेड के प्रबंधकों के बीच बैठकों का दौर जारी है।
सरकार की ओर से मध्यस्थता की जा रही है ताकि गुणवत्ता जांच की एक ऐसी पारदर्शी प्रणाली विकसित की जा सके जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए राशन के नमूनों की जांच किसी तीसरे पक्ष या स्वतंत्र सरकारी लैब से कराई जाए। साथ ही, मार्कफेड के रुके हुए बकाये और सप्लाई के नए प्रोटोकॉल पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद सरकारी तंत्र की आंतरिक कार्यप्रणाली की खामियों को उजागर करते हैं। एक ओर जहां गुणवत्ता से समझौता करना करोड़ों बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, वहीं दूसरी ओर बिना किसी ठोस विकल्प के सप्लाई रोक देना भी उचित नहीं माना जा सकता। वर्तमान में पंजाब के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब तबके के लिए आंगनवाड़ी राशन एक बड़ा सहारा है, ऐसे में इस विवाद का लंबा खिंचना सामाजिक संकट का रूप ले सकता है। अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह मार्कफेड की शर्तों को मानकर सप्लाई बहाल कराती है या फिर राशन वितरण के लिए किसी नए टेंडर या संस्था की तलाश की जाएगी। फिलहाल, विभाग इस कोशिश में जुटा है कि इस प्रशासनिक लड़ाई का खमियाजा मासूम बच्चों और जरूरतमंद महिलाओं को न भुगतना पड़े।
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