पंजाब

Punjab: मलेरकोटला नर्सरी ने खींचा ध्यान

Payal
12 April 2026 1:45 PM IST
Punjab: मलेरकोटला नर्सरी ने खींचा ध्यान
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Punjab.पंजाब: मलेरकोटला की एक नर्सरी ने हाल ही में आयोजित कृषि प्रदर्शनी में किसानों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। “हर पत्ते में विरासत” की थीम पर प्रस्तुत इस नर्सरी ने पारंपरिक पौधों, औषधीय वनस्पतियों और स्थानीय जैव विविधता की अनोखी झलक पेश की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रदर्शनी में नर्सरी की ओर से विभिन्न प्रकार के पौधों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें औषधीय गुणों वाले पौधे, फलदार वृक्ष और स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियां शामिल थीं। इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती और जैविक कृषि की ओर प्रेरित करना था।
नर्सरी संचालकों ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल पौधे उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि किसानों को पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक कृषि ज्ञान से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती के साथ यदि पारंपरिक ज्ञान को जोड़ा जाए तो उत्पादन और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल सकता है।
Punjab में कृषि क्षेत्र पहले से ही राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में इस तरह की पहलें किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में प्रेरित करती हैं। प्रदर्शनी में आए कई किसानों ने नर्सरी की इस पहल की सराहना की और इसे अपने खेतों में अपनाने की इच्छा जताई।
किसानों का कहना है कि प्रदर्शनी में उन्हें कई ऐसे पौधों और तकनीकों के बारे में जानकारी मिली, जिनसे वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही जैविक खेती की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने इस पहल को बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि कृषि में विविधता और पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है। इस तरह की नर्सरियां न केवल किसानों को जागरूक करती हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करती हैं।
Malerkotla की इस नर्सरी ने यह साबित किया है कि यदि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, कृषि प्रदर्शनी में “हर पत्ते में विरासत” थीम पर मलेरकोटला की नर्सरी ने किसानों का ध्यान आकर्षित कर एक प्रेरणादायक संदेश दिया है कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही कृषि का भविष्य मजबूत हो सकता है।
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