
Punjab पंजाब: लुधियाना जिले के जगराओं के निकट गांव पब्बियां में हड्डा रोडी क्षेत्र के आसपास घूम रहे आवारा और खतरनाक कुत्तों के झुंड ने एक बार फिर दहशत फैला दी है। मंगलवार देर रात हुए इस हमले में 50 वर्षीय प्रवासी श्रमिक रमेश मंडल की दर्दनाक मौत हो गई। बुधवार सुबह उनका क्षत-विक्षत शव खेतों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
जानकारी के अनुसार मृतक रमेश मंडल (50) बिहार के पूर्णिया जिले के मनखनाहा गांव के रहने वाले थे। वह हर साल की तरह इस बार भी पंजाब के गांव पब्बियां में धान की रोपाई के लिए अन्य श्रमिकों के साथ आए थे। सभी मजदूर गांव के किसान हरबंस सिंह के खेतों में काम कर रहे थे और खेत में बने मोटर कमरे की छत पर रात में ठहरे हुए थे।
पुलिस चौकी चौकीमान के प्रभारी एएसआई सुखमंदर सिंह ने बताया कि मंगलवार देर रात रमेश मंडल के मोबाइल पर किसी का फोन आया था। फोन आने के बाद वह बात करने के लिए कमरे की छत से नीचे उतरे और खेतों की ओर चले गए। इसी दौरान खेतों में घूम रहे आवारा कुत्तों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि कुत्तों ने उन्हें घेरकर बुरी तरह नोच डाला। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। कुत्तों ने उनके गले, चेहरे और शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया, जिससे शव पहचानने में भी कठिनाई हुई।
घटना की जानकारी बुधवार सुबह उस समय मिली जब अन्य मजदूरों ने रमेश मंडल को खेतों में तलाश किया। काफी खोजबीन के बाद उनका शव खेतों में पड़ा मिला। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद श्रमिकों में हड़कंप मच गया और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि यह मामला आवारा कुत्तों के हमले का प्रतीत होता है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके।
इस दर्दनाक घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हड्डा रोडी क्षेत्र के आसपास लंबे समय से आवारा कुत्तों का झुंड सक्रिय है, जो कई बार छोटे जानवरों और राहगीरों पर हमला कर चुका है। लेकिन इस बार यह हमला जानलेवा साबित हुआ।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जाए, क्योंकि खेतों में काम करने वाले मजदूर और ग्रामीण अक्सर देर रात या सुबह के समय अकेले आते-जाते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
किसानों और मजदूरों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से प्रवासी श्रमिकों में डर का माहौल बन रहा है। कई श्रमिक अब देर रात खेतों में जाने से बच रहे हैं, जिससे कृषि कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और संबंधित पंचायत व नगर प्रशासन को भी सूचित किया जाएगा ताकि आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
कुल मिलाकर, जगराओं के पास हुई यह घटना न केवल एक प्रवासी श्रमिक की दर्दनाक मौत का मामला है, बल्कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उससे उत्पन्न खतरे की गंभीर चेतावनी भी है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।





