पंजाब

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब

Kiran
7 Oct 2026 11:36 AM IST
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब
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Punjab पंजाब महंगाई भत्ता (डीए) मामले में एसएलपी में खामियां ठीक हो जाने के पंजाब के दावे पर सवाल उठाने के एक दिन बाद, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव द्वारा अपने हलफनामे में दिए गए बयान को "स्पष्ट रूप से झूठा" पाया। पीठ ने उन्हें यह बताने के लिए नोटिस जारी किया कि अदालत को "जानबूझकर गुमराह करने" के लिए आपराधिक अवमानना ​​​​कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। उन्हें सुनवाई की अगली तारीख शुक्रवार को भी उपस्थित रहने को कहा गया है।
"रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से, हम प्रथम दृष्टया पाते हैं कि इस अदालत के समक्ष मुख्य सचिव द्वारा जानबूझकर गलत बयान दिया गया है। इसलिए, हम मुख्य सचिव को यह बताने के लिए नोटिस जारी कर रहे हैं कि झूठे दावे करके इस अदालत को जानबूझकर गुमराह करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए," अदालत ने कहा।
यह घटनाक्रम एचसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से प्राप्त एक रिपोर्ट के बाद हुआ। मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने दर्ज किया कि रिपोर्ट "स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पंजाब द्वारा दायर अपील में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा बताई गई खामियों को दूर नहीं किया गया है"। रिपोर्ट से यह भी पता चला कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) द्वारा दायर अपील दोषपूर्ण बनी हुई है। बेंच ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की रिपोर्ट से, यह स्पष्ट है कि कल अदालत के समक्ष एक गलत बयान दिया गया था।" अदालत ने सोमवार को अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वह राज्य की अपील के दोषों को ठीक करने के बाद तुरंत सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की स्थिति रिपोर्ट प्राप्त करे। मुख्य सचिव भी कोर्ट में पेश हुए थे और हलफनामा दाखिल किया था.
जैसे ही मामला मंगलवार सुबह सुनवाई के लिए आया, बेंच ने दर्ज किया कि 3 अगस्त के फैसले में उसके निर्देश के बावजूद एक हलफनामा दायर नहीं किया गया था, जिसमें मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक इसे दाखिल करने की आवश्यकता थी। अदालत ने कहा कि इसके बाद, संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करते हुए याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं द्वारा दायर आवेदनों पर मामला उसके सामने रखा गया था। मामले में आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने अदालत की सहायता की। इसी मामले में एक और आवेदन वकील गगनेश्वर वालिया और हरगुन सेठी के माध्यम से दायर किया गया था, और वरिष्ठ वकील चेतन मित्तल ने बहस की थी।
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