पंजाब
Punjab: खेलों के मैदान से नशे के खिलाफ जंग, एक्सपर्ट्स ने जताई उम्मीद
Ratna Netam
17 April 2026 12:51 PM IST

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Punjab.पंजाब: पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर विशेषज्ञों ने एक अहम सुझाव दिया है। उनका कहना है कि राज्य के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे की लत से दूर रखने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करते हैं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा भी देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कबड्डी, कुश्ती, रस्साकशी, गटका और अन्य पारंपरिक पंजाबी खेलों में भागीदारी बढ़ाने से युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित होता है। यही गुण उन्हें नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और खेल विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि यदि गांव-गांव में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए, तो युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जा सकता है। उनका कहना है कि खाली समय और अवसरों की कमी भी कई बार युवाओं को गलत रास्ते की ओर धकेलती है, जिसे खेल गतिविधियों के जरिए रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर पारंपरिक खेलों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे बचपन से ही इन खेलों से जुड़ सकें। इससे न केवल उनकी फिटनेस बेहतर होगी, बल्कि वे सामाजिक रूप से भी अधिक सक्रिय और जागरूक बनेंगे। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर खेल आयोजन किए जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें और व्यापक स्तर पर ले जाने की जरूरत है। यदि स्थानीय प्रशासन और पंचायतें मिलकर नियमित खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करें, तो इसका असर और भी सकारात्मक हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खेलों में भाग लेने से दिमाग में सकारात्मक हार्मोन सक्रिय होते हैं, जिससे तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं भी कम होती हैं। यह पहलू भी युवाओं को नशे की ओर जाने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा, सामाजिक स्तर पर भी खेलों के माध्यम से युवाओं में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है, जिससे समाज में सकारात्मक माहौल बनता है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि खेलों को नशा विरोधी अभियान से जोड़ा जाए, तो इसके परिणाम और अधिक प्रभावी हो सकते हैं। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों की यह राय एक महत्वपूर्ण दिशा की ओर इशारा करती है कि पारंपरिक खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज की गंभीर समस्याओं जैसे नशे से लड़ने में भी प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले समय में यदि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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