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चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में एकजुटता और आंतरिक मतभेदों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। करीब दस दिन पहले कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए थे। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी सार्वजनिक रूप से साथ खड़े होकर एकता का संदेश दिया था। लेकिन शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुए पार्टी के प्रदर्शन में चन्नी की गैरमौजूदगी ने फिर राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी।
पंजाब कांग्रेस ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने किया। पार्टी के विधायक, नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सेक्टर-17 में जुटे। प्रदर्शनकारी निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच गतिरोध बढ़ने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान राजा वड़िंग समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और निर्वाचन आयोग को लेकर कई आरोप लगाए, हालांकि ये पार्टी के राजनीतिक आरोप हैं।इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की अनुपस्थिति खास तौर पर चर्चा में रही। यह इसलिए महत्वपूर्ण बनी क्योंकि 15 सितंबर को चंडीगढ़ में ही हुए कांग्रेस के पिछले बड़े प्रदर्शन में चन्नी, वड़िंग और दूसरे वरिष्ठ नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में एक साथ नजर आए थे।
15 सितंबर का प्रदर्शन पंजाब के संगरूर जिले के गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर आयोजित किया गया था। कांग्रेस ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद यह उनका राज्य का पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम था। इस दौरान पार्टी के विभिन्न खेमों से जुड़े नेता एक मंच पर दिखाई दिए थे।उस प्रदर्शन में सचिन पायलट के साथ राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पायलट ने मंच पर चन्नी और वड़िंग को हाथ मिलवाया था। इसे पंजाब कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा गया।
पंजाब कांग्रेस में वड़िंग और चन्नी से जुड़े नेताओं के बीच मतभेदों की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। सितंबर की शुरुआत में सचिन पायलट को पंजाब मामलों का नया AICC प्रभारी बनाए जाने के समय भी प्रदेश संगठन में अलग-अलग खेमों और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान चर्चा में थी। पायलट ने भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी।15 सितंबर को पायलट की मौजूदगी में हुए प्रदर्शन को इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना गया। चन्नी और वड़िंग करीब तीन महीने बाद एक मंच पर नजर आए और दोनों के बीच बातचीत तथा हाथ मिलाने की तस्वीरें सामने आईं। पार्टी नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से सामूहिक नेतृत्व और एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का संदेश दिया था।
लेकिन 25 सितंबर को हुए अगले बड़े प्रदर्शन में सचिन पायलट मौजूद नहीं थे और चन्नी भी कार्यक्रम में नजर नहीं आए। इससे एक बार फिर यह सवाल उठा कि क्या पंजाब कांग्रेस में दिखाई गई एकता स्थायी संगठनात्मक तालमेल में बदल पाई है। हालांकि केवल किसी एक कार्यक्रम में किसी नेता की अनुपस्थिति से आंतरिक मतभेद का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। चन्नी की गैरमौजूदगी के कारण को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।पंजाब कांग्रेस के लिए आंतरिक समन्वय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। सचिन पायलट ने प्रदेश प्रभारी के तौर पर सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी के नेताओं ने भी विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की बात कही है और मुख्यमंत्री पद का चेहरा पहले से घोषित नहीं करने के रुख का समर्थन किया है।
प्रदेश कांग्रेस में कई बड़े चेहरे हैं। राजा वड़िंग प्रदेश अध्यक्ष हैं, प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत दूसरे वरिष्ठ नेताओं का भी प्रदेश संगठन में प्रभाव है। ऐसे में अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है।शुक्रवार के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां थीं। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। इन आरोपों को कांग्रेस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए; प्रदर्शन या राजनीतिक बयान अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करते।
फिलहाल पंजाब कांग्रेस के भीतर राजनीतिक तस्वीर दो अलग-अलग घटनाओं के कारण चर्चा में है। 15 सितंबर को सचिन पायलट की मौजूदगी में चन्नी और वड़िंग समेत लगभग सभी प्रमुख नेताओं ने एक मंच पर आकर एकता का संदेश दिया था। दस दिन बाद हुए चंडीगढ़ प्रदर्शन में चन्नी की गैरमौजूदगी ने फिर संगठन के भीतर तालमेल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।आने वाले महीनों में पार्टी के कार्यक्रमों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से यह अधिक स्पष्ट होगा कि पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से दिखाई गई एकजुटता संगठनात्मक स्तर पर कितनी कायम रहती है।
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