पंजाब

Punjab CM Mann ने SAD की आलोचना को बताया राजनीतिक ढाल

Ratna Netam
7 May 2026 12:28 PM IST
Punjab CM Mann ने SAD की आलोचना को बताया राजनीतिक ढाल
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Punjab.पंजाब: पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने राज्य की शांति और कानून व्यवस्था से जुड़े एक विवादित मुद्दे पर मंगलवार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच टकराव को बढ़ाते हुए दावा किया कि Shiromani Akali Dal (SAD) द्वारा बेअदबी विरोधी कानून की आलोचना उनकी ‘स्वयं की भूमिका’ से उत्पन्न हुई है।

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, “SAD को इस कानून की आलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उनकी अपनी गतिविधियों और इतिहास ने यह स्थिति पैदा की है। इस कानून का उद्देश्य केवल धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा और समाज में शांति बनाए रखना है। SAD के नेता और उनके समर्थक इस पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि उनकी स्वयं की भूमिका ने इस विवाद को जन्म दिया।”
CM मान के इस बयान के बाद पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल SAD ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज किया और कहा कि यह राजनीतिक बयानबाजी के अलावा कुछ नहीं। SAD ने अपने बयान में कहा, “कानून के नाम पर किसी भी तरह का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है। जनता और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना हमारा अधिकार है और हम इसे मजबूती से करते रहेंगे।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक स्थिति में और अधिक गर्मी ला सकता है। CM मान ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों, गुरुद्वारों और सार्वजनिक स्थानों में शांति बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसी भी तरह की धार्मिक अशांति या सामाजिक तनाव को रोकना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि SAD की आलोचना और CM मान का जवाब दोनों ही चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। पंजाब में राजनीतिक दल अक्सर संवेदनशील मुद्दों पर मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए जोर-शोर से बयानबाजी करते हैं। CM मान का बयान इस दिशा में स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार कानून और व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपना रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कानून के सही और न्यायपूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाज में सामूहिक शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। कानून का कोई भी उल्लंघन सहन नहीं किया जाएगा।”
SAD के नेताओं ने हालांकि इस आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि वे लोकतांत्रिक ढंग से अपनी चिंता और सुझाव व्यक्त कर रहे हैं। उनके अनुसार, किसी भी कानून की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे व्यक्तिगत भूमिका से जोड़ना उचित नहीं है।
इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बेअदबी विरोधी कानून को लेकर आगामी दिनों में और बयानबाजी, सार्वजनिक रैलियों और मीडिया में बहस बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला पंजाब की राजनीति में भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दों के साथ चुनावी रणनीतियों को जोड़ने का उदाहरण बन सकता है।
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