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Punjab : भाजपा ने नगर निकाय चुनावों में धांधली का लगाया आरोप, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

Kavita2
11 July 2026 10:55 AM IST
Punjab : भाजपा ने नगर निकाय चुनावों में धांधली का लगाया आरोप, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
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चंडीगढ़ : पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में हुए नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के साथ-साथ मेयर और अध्यक्ष पद के चुनावों में कथित रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने शनिवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की।

भाजपा ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया और जनता के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि कई स्थानों पर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाया गया।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में भाजपा ने मांग की है कि जिन स्थानों पर चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई है, वहां दोबारा चुनाव कराए जाएं। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और किसी भी स्तर पर जनादेश के साथ छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती।

भाजपा नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

भाजपा नेताओं का आरोप है कि नगर निकाय चुनावों के दौरान सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

ज्ञापन सौंपने वाले नेताओं ने कहा कि स्थानीय निकाय संस्थाएं लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं। इन संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधि सीधे जनता से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होना आवश्यक है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद मेयर और अध्यक्ष पदों के चुनाव में भी कथित अनियमितताएं सामने आईं। भाजपा नेताओं ने कहा कि कुछ मामलों में बहुमत और जनसमर्थन के बावजूद अलग परिणाम देखने को मिले, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

राज्यपाल से कार्रवाई की मांग

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। पार्टी ने कहा कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास बना रहे।

भाजपा ने यह भी मांग की कि जिन क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है, वहां दोबारा मतदान कराया जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने वाले भाजपा नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, अश्विनी शर्मा, मनोरंजन कालिया, अमनजोत कौर रामूवालिया, जंगी लाल महाजन, सुभाष शर्मा, फतेहजंग सिंह बाजवा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।

नेताओं ने राज्यपाल के सामने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अपनी आपत्तियां रखीं और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं।

भाजपा ने लोकतांत्रिक अधिकारों का उठाया मुद्दा

भाजपा नेताओं ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। ऐसे में यदि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप होता है तो यह जनता के अधिकारों का उल्लंघन है।

पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र होना भी जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकार से भी आग्रह किया कि भविष्य में होने वाले चुनावों में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल

भाजपा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावों में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करेगी तो लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होगा।

हालांकि, इस मामले में राज्य सरकार या सत्तारूढ़ दल की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे की रणनीति पर नजर

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद भाजपा ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी। पार्टी का कहना है कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

फिलहाल भाजपा की मांग है कि नगर निकाय चुनावों और मेयर-अध्यक्ष पदों के चुनाव से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां उचित कार्रवाई की जाए।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस मामले में राज्यपाल कार्यालय और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

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