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Chandigarh चंडीगढ़। अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार को श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि सर्वसम्मति से कर दी। 14 वर्षों में यह पहला ऐसा निर्णय है। पंजाब के श्रम मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को 'कीर्ति दिवस' के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री सोंद ने कहा कि लगभग 69 वर्षों के बाद शुक्रवार को आयोजित यह ऐतिहासिक सत्र, राष्ट्र, समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों के अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक विकास परियोजना और प्रगति का प्रत्येक मील का पत्थर श्रमिक वर्ग के अथक प्रयासों, समर्पण और बलिदानों के माध्यम से ही संभव हो पाता है।
मई दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह दिन 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में हुए ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान श्रमिकों द्वारा किए गए बलिदानों की याद दिलाता है, जिसके परिणामस्वरूप आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग उठी थी। उन्होंने आगे कहा कि यह दिन सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और श्रम अधिकारों की निरंतर खोज का प्रतीक है।
मंत्री ने पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर भी जोर दिया और गुरु नानक देव की शिक्षाओं को याद किया, जिन्होंने “किरत करो, वंड छको, नाम जपो” (कड़ी मेहनत करो, ईश्वर को अपने हृदय में रखो और अपनी मेहनत का फल जरूरतमंदों के साथ बांटो) के मार्गदर्शक सिद्धांतों के माध्यम से श्रम की गरिमा और महत्व पर बल दिया था।
वर्तमान वेतन संरचना की ओर ध्यान दिलाते हुए मंत्री सोंद ने सदन को बताया कि पंजाब में न्यूनतम मजदूरी की आधार दर में अंतिम संशोधन 2012 में हुआ था और अब राज्य सरकार ने श्रमिकों को आवश्यक राहत प्रदान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि महंगाई भत्ता में समय-समय पर वृद्धि हुई है, लेकिन मूल दर अपरिवर्तित रही है, जिससे समाज के बड़े वर्ग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
समय पर संशोधन की आवश्यकता को पहचानते हुए सदन ने राज्य सरकार को न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के लिए निर्णायक कदम उठाने की सिफारिश की।
प्रस्ताव में यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि श्रमिकों को राज्य के विकास और समृद्धि में उनके अमूल्य योगदान के लिए उचित मान्यता, उचित मुआवजा और पुरस्कार मिले।
इस प्रस्ताव के पारित होने से पंजाब भर के श्रमिकों के कल्याण और उत्थान के प्रति सदन की सामूहिक प्रतिबद्धता झलकती है।
श्रम मंत्री ने क्रांतिकारी पंजाबी कवि संत राम उदासी की एक भावपूर्ण कविता भी पढ़ी।
उन्होंने श्रमिकों के हित में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सराहनीय कदमों पर भी प्रकाश डाला।
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