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पंजाब एवं हरियाणा HC ने आत्महत्या मामले में आरोपी महिला के पिता को दी नियमित जमानत

Kavita2
4 July 2026 4:25 PM IST
पंजाब एवं हरियाणा HC ने आत्महत्या मामले में आरोपी महिला के पिता को दी नियमित जमानत
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Punjab पंजाब: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में नामजद होने के बाद युवक की आत्महत्या से जुड़े प्रकरण में आरोपी महिला के पिता को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध बनता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ट्रायल कोर्ट द्वारा ही किया जाएगा।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय वशिष्ठ ने सीताराम की याचिका को स्वीकार कर लिया और उन्हें नियमित जमानत देने के आदेश जारी किए। अदालत ने माना कि मामले की विस्तृत जांच और ट्रायल के दौरान ही वास्तविक तथ्यों का निर्धारण संभव है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत से वंचित रखना उचित नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार, यह मामला भिवानी जिले के सिवानी थाना क्षेत्र का है, जहां 2 फरवरी 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी, और इसके बाद आरोपी महिला के पिता को इस मामले में नामजद किया गया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और आत्महत्या की घटना से उनका सीधा संबंध नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रभावित हो सकती है।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह टिप्पणी की कि आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे मामलों में प्रत्येक परिस्थिति का गहन विश्लेषण आवश्यक होता है और इसका अंतिम निष्कर्ष ट्रायल कोर्ट ही साक्ष्यों के आधार पर निकाल सकता है।

अदालत ने यह भी माना कि फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक नहीं प्रतीत होता, इसलिए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दिया जाना उचित है।

इस आदेश के बाद आरोपी पक्ष को बड़ी राहत मिली है, जबकि मामले की आगे की सुनवाई अब ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

कुल मिलाकर, हाई कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में भी जमानत का निर्णय प्रारंभिक साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाता है, जबकि अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान तथ्यों के विस्तृत मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

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