
Punjab पंजाब: कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से विधानसभा चुनाव समिति की सूची को लेकर शुरू हुआ अंदरूनी विवाद अब शांत कराने की दिशा में प्रयासों के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है। पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने और एकजुटता का संदेश देने के लिए कांग्रेस हाईकमान लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। संगठन के शीर्ष स्तर से यह संकेत दिए जा रहे हैं कि किसी भी तरह की गुटबाजी को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा और जल्द ही समन्वय स्थापित करने की कोशिश होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव समिति की सूची को लेकर शुरू हुआ असंतोष धीरे-धीरे नेताओं के अलग-अलग समूहों में बदल गया था, जिससे प्रदेश संगठन में तनाव की स्थिति बन गई थी। हालांकि अब हालात को सामान्य करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत शुरू हो गई है और वरिष्ठ नेता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सामने आए हैं। संगठन के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर समर्थन का माहौल बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पार्टी के अंदर इसे एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को अब स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राणा के.पी. सिंह और शमशेर सिंह धूलो सहित कई नेताओं ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्हें दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर बधाई दी गई और संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में यह भी बात उठी कि पार्टी को आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ना जरूरी है।
पार्टी के अंदर यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब संगठन में विभिन्न स्तरों पर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। हालांकि नेताओं के बीच इस तरह की मुलाकातों को सुलह की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दोनों ही अपने-अपने समर्थक समूहों के साथ लगातार आंतरिक बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य संगठन में अपनी स्थिति मजबूत करना और आगामी रणनीति पर चर्चा करना बताया जा रहा है।
Amarinder Singh Raja Warring वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक गतिविधियों को संभाल रहे हैं, जबकि Charanjit Singh Channi भी पार्टी के भीतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अपने समर्थकों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव समिति की सूची को लेकर उठे विवाद ने संगठन के भीतर कई स्तरों पर असंतोष पैदा किया था। कुछ नेताओं का मानना था कि निर्णय प्रक्रिया में सभी पक्षों को समान रूप से शामिल नहीं किया गया, जिससे मतभेद बढ़े।
हालांकि अब पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को शांत करने के लिए सक्रिय हो गया है। हाईकमान का प्रयास है कि पंजाब में संगठन को आगामी चुनावों से पहले मजबूत और एकजुट किया जाए, ताकि किसी भी तरह की आंतरिक कमजोरी का असर चुनावी प्रदर्शन पर न पड़े।
वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और लगातार बैठकों को इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बैठकें हो सकती हैं, जिनमें सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी।
पार्टी के अंदरूनी हलकों का मानना है कि यदि यह सुलह प्रयास सफल रहते हैं तो संगठन में स्थिरता लौट सकती है और चुनावी तैयारियों को मजबूती मिल सकती है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि मतभेद पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा और इसके लिए लगातार संवाद और समझौते की जरूरत होगी।
फिलहाल कांग्रेस हाईकमान की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और सभी पक्षों को संतुलित करने की कोशिशें जारी हैं।





