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चंडीगढ़। पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) से जुड़े नेता सुरजीत भूरा ने कहा है कि झोटा की मौत ने पंजाब के लोगों को जगा दिया है। उनके इस बयान को राज्य में नशे की समस्या और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। झोटा की हत्या के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न्याय की मांग उठाई है।पंजाब के मानसा जिले से संबंध रखने वाले परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ अपनी सक्रियता के कारण चर्चित थे। वह कथित रूप से नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और नशे के कारोबार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक रूप से उठाते रहे थे। उनकी गतिविधियों को लेकर पहले भी विवाद सामने आए थे, लेकिन नशे के खिलाफ उनकी मुहिम को स्थानीय स्तर पर समर्थन भी मिला था।अक्टूबर 2026 में झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घटना उस समय हुई जब वह कथित रूप से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर एक मेडिकल स्टोर संचालक से सवाल कर रहे थे। घटना के दौरान वह फेसबुक पर लाइव भी थे। हत्या के मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को आरोपी बनाया गया और बाद में राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी परिस्थितियां और संभावित साजिश जांच का विषय हैं।
झोटा की हत्या के बाद मानसा सहित पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध की आवाज उठने लगी। उनके समर्थकों और परिवार के सदस्यों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की। घटना ने नशे के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता सुरजीत भूरा का बयान इसी पृष्ठभूमि में सामने आया है। उनके अनुसार, झोटा की मौत ने पंजाब के लोगों को जागरूक किया है। इस टिप्पणी का राजनीतिक और सामाजिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि राज्य में नशे का मुद्दा लंबे समय से चुनावी बहस और सार्वजनिक आंदोलनों का हिस्सा रहा है।पंजाब में नशे की समस्या को लेकर लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर नशा तस्करी के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग करते रहे हैं। राज्य सरकार भी नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। हालांकि, झोटा की हत्या के बाद यह सवाल फिर प्रमुखता से सामने आया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को पर्याप्त सुरक्षा कैसे उपलब्ध कराई जाए।इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निष्पक्ष और व्यापक जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और यदि किसी साजिश का पता चलता है तो उसे भी सामने लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गलत काम में शामिल किसी भी व्यक्ति को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने झोटा की हत्या तथा नशे की समस्या पर सवाल उठाने वाले एक अन्य व्यक्ति गुलजार सिंह की मौत के संबंध में पंजाब सरकार से जवाब मांगने की बात कही थी। इससे यह मामला राज्य की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।झोटा की हत्या के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने उनके परिवार से मुलाकात की। शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल, कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए न्याय की मांग का समर्थन किया।सिख धार्मिक नेतृत्व की ओर से भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने परिवार से मुलाकात की। अकाल तख्त के जत्थेदार ने झोटा को सिख समुदाय के शहीद का दर्जा भी दिया था।हत्या के बाद झोटा के परिवार और समर्थकों का आंदोलन कई दिनों तक जारी रहा। परिवार की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच, न्याय और सुरक्षा से संबंधित सवाल शामिल थे। विरोध प्रदर्शन को विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों का समर्थन भी मिला।इस बीच मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब सरकार ने परिवार को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और झोटा की पत्नी को सरकारी नौकरी देने पर सहमति जताई है। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास के बाहर चल रहा विरोध प्रदर्शन समाप्त किया गया।
वहीं, करीब 22 दिनों के आंदोलन के बाद परिवार झोटा के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए भी सहमत हो गया। शुक्रवार, 6 नवंबर को शव मानसा से चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर लाया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, परिवार और सरकार के बीच सहमति बनने के बावजूद हत्या की आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण हैं। मामले में गिरफ्तार आरोपी की भूमिका, घटना के पीछे का कारण और अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता जैसे सवालों का अंतिम जवाब जांच तथा अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे समय में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। झोटा की हत्या के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार के सामने सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए हैं।अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का संबंध खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के समर्थकों द्वारा गठित राजनीतिक संगठन से है। यह दल पंजाब में नशे, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता देता रहा है। झोटा की हत्या को लेकर उसके नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी इसी व्यापक राजनीतिक चर्चा का हिस्सा हैं।सुरजीत भूरा के बयान ने एक बार फिर नशे के खिलाफ सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता को सामने रखा है। झोटा की हत्या से उपजा आक्रोश केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब में नशे की समस्या से जुड़ी व्यापक चिंताओं को भी दर्शाता है।अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि झोटा के परिवार को न्याय कब मिलेगा और नशे के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। पंजाब सरकार की जांच, पुलिस की कार्रवाई और अदालत की आगामी प्रक्रिया पर लोगों की नजरें बनी हुई हैं।
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