पंजाब

LADC नीति पर विरोध तेज, हाई कोर्ट में आज कामकाज बंद

Kavita2
24 July 2026 10:31 AM IST
LADC नीति पर विरोध तेज, हाई कोर्ट में आज कामकाज बंद
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चंडीगढ़ : कानूनी सहायता बचाव वकील (एलएडीसी) नीति के विरोध में चल रहा वकीलों का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। आंदोलनरत वकीलों के समर्थन में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में न्यायिक कार्य पूरी तरह स्थगित रखने का फैसला लिया है। बार एसोसिएशन के इस निर्णय के बाद अदालत में नियमित सुनवाई प्रभावित रहेगी।

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने आंदोलन कर रहे वकीलों की मांगों और उनकी चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया है। एसोसिएशन का कहना है कि वकीलों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और उनकी आपत्तियों का समाधान जरूरी है।

एलएडीसी नीति को लेकर पिछले कुछ समय से वकीलों के बीच असंतोष बना हुआ है। आंदोलनरत वकीलों का कहना है कि इस नीति के कुछ प्रावधानों को लेकर उन्हें आपत्ति है और इससे अधिवक्ताओं की भूमिका, कार्यप्रणाली और अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी को लेकर वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

वकीलों का कहना है कि कानूनी सहायता व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन इसे लागू करते समय अधिवक्ताओं के हितों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने आंदोलनरत वकीलों के समर्थन में कामकाज स्थगित करने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के इस फैसले से हाई कोर्ट में आने वाले मामलों की सुनवाई पर असर पड़ेगा। हालांकि, जरूरी और आपात मामलों को लेकर अदालत की ओर से अलग व्यवस्था की जा सकती है।

वकीलों के आंदोलन को लेकर न्यायिक और कानूनी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वे न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।

एलएडीसी नीति का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना बताया जाता है। इसके तहत ऐसे लोगों को कानूनी प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की जाती है, जो आर्थिक कारणों से वकील नहीं कर पाते। हालांकि, इस व्यवस्था के संचालन और इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका को लेकर कुछ वकीलों ने सवाल उठाए हैं।

आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि वे कानूनी सहायता व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि नीति के कुछ पहलुओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को वकीलों के सुझावों को शामिल करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

बार एसोसिएशन के फैसले के बाद अब सभी की नजर आगे की बातचीत और समाधान की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर है। वकीलों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल होगी और विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए वकीलों और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। किसी भी नई नीति को लागू करते समय सभी हितधारकों की भागीदारी से विवादों को कम किया जा सकता है।

इस बीच, हाई कोर्ट परिसर में आंदोलन को लेकर वकीलों के बीच बैठकों का दौर जारी है। अधिवक्ता अपने अगले कदम को लेकर रणनीति तैयार कर रहे हैं। वहीं, बार एसोसिएशन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

वकीलों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है। हालांकि, वे बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं।

फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में शुक्रवार को कामकाज स्थगित रखने का फैसला आंदोलन के प्रति वकीलों के समर्थन को दर्शाता है। अब यह देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच सहमति बन पाती है।

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