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पंजाबी यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन तेज

Kavita2
24 Aug 2026 2:19 PM IST
पंजाबी यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन तेज
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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी (PU), पटियाला में फीस बढ़ोतरी के विरोध में विद्यार्थियों का आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। स्टूडेंट्स जत्थेबंदी यूनाइटेड सिख स्टूडेंट फेडरेशन से जुड़े विद्यार्थियों ने सुबह विश्वविद्यालय के सभी मुख्य गेट बंद कर दिए। प्रदर्शन के दौरान किसी कर्मचारी या विद्यार्थी को परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। मुख्य गेट बंद होने के कारण विश्वविद्यालय पहुंचने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों को बाहर से ही वापस लौटना पड़ा।

फीस बढ़ोतरी के विरोध में विद्यार्थियों का यह आंदोलन पिछले कुछ समय से चल रहा है। छात्र संगठन लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उच्च शिक्षा पहले ही महंगी हो चुकी है और ऐसे समय में फीस में और बढ़ोतरी करना छात्रों के हित में नहीं है।

सुबह से ही गेटों पर जुटे विद्यार्थी

सोमवार सुबह यूनाइटेड सिख स्टूडेंट फेडरेशन से जुड़े विद्यार्थी विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वारों पर एकत्र होने लगे। छात्रों ने सभी प्रमुख गेटों को बंद कर दिया और वहीं धरना देकर विरोध जताया।

गेट बंद किए जाने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में आने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को प्रवेश नहीं मिल सका। कई कर्मचारी विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद बाहर ही रुक गए। जब उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली तो उन्हें वापस लौटना पड़ा।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन फीस बढ़ोतरी के खिलाफ है और जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक विरोध जारी रहेगा।

फीस बढ़ोतरी से अतिरिक्त आर्थिक बोझ का आरोप

विद्यार्थी संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस में बढ़ोतरी कर छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके लिए पहले से ही पढ़ाई, हॉस्टल, किताबों और अन्य आवश्यक खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल होता है।

छात्र नेताओं के अनुसार, फीस बढ़ने का सीधा असर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। इससे ऐसे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और मुश्किल हो सकता है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।

लंबे समय से चल रहा विरोध

फीस वृद्धि का मुद्दा नया नहीं है। विद्यार्थी संगठन लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांग फीस बढ़ोतरी वापस लेना है। इसके अलावा विद्यार्थी संगठन अपनी अन्य मांगों को भी प्रशासन के सामने रखते रहे हैं।

छात्र नेताओं का कहना है कि कई बार अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। इसी वजह से आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया।

गेट बंद कर जताया विरोध

सोमवार को गेट बंद करने का फैसला आंदोलन को व्यापक बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय के सभी मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए, जिससे सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।

गेट बंद होने के कारण विश्वविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई कर्मचारी बाहर से ही लौट गए। वहीं कुछ विद्यार्थियों को भी परिसर में प्रवेश नहीं मिल सका।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि प्रशासन को उनकी मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। छात्रों ने स्पष्ट किया कि फीस बढ़ोतरी वापस होने तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

उच्च शिक्षा पर असर की चिंता

छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती फीस के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए उच्च शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी का असर केवल मौजूदा विद्यार्थियों पर ही नहीं, बल्कि नए दाखिले लेने वाले छात्रों पर भी पड़ सकता है।

विद्यार्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस से संबंधित किसी भी फैसले पर छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करे। उनका कहना है कि छात्रों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही शुल्क संरचना तैयार की जानी चाहिए।

प्रशासन से बातचीत की मांग

प्रदर्शन के बीच छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से बातचीत की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।

विद्यार्थियों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन यदि फीस बढ़ोतरी को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखने की रणनीति बनाई जाएगी।

कर्मचारियों और छात्रों को हुई परेशानी

सभी मुख्य गेट बंद होने से विश्वविद्यालय की नियमित गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश नहीं मिला और कई लोग वापस लौट गए। विद्यार्थियों को भी अंदर जाने में परेशानी हुई।

विश्वविद्यालय जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश द्वारों के बंद रहने से प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने छात्रों की मांगों का समाधान करने के साथ परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती है।

आंदोलन आगे बढ़ने के संकेत

फीस बढ़ोतरी को लेकर विद्यार्थियों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को सभी मुख्य गेट बंद किए जाने से यह साफ संकेत मिला है कि छात्र संगठन अब आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी में हैं।

छात्र नेताओं ने फीस वृद्धि को विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल पंजाबी यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। सोमवार के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय परिसर की सामान्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम और छात्रों के साथ होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने पर विद्यार्थियों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

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