
चंडीगढ़। पंजाब में कथित औद्योगिक प्लॉट आवंटन घोटाले की जांच कर रहे एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी ने अब विवादित JCT इलेक्ट्रॉनिक्स जमीन मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब किए हैं। यह मामला मोहाली स्थित बंद हो चुकी JCT इलेक्ट्रॉनिक्स की करीब 31 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
आरोप है कि इस जमीन सौदे में नियमों की अनदेखी की गई और इससे पंजाब सरकार के खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ED अब इस सौदे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें जमीन आवंटन प्रक्रिया, कीमत निर्धारण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका शामिल है।
PSIEC के औद्योगिक प्लॉट आवंटन की जांच
ED पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) के कथित औद्योगिक प्लॉट आवंटन घोटाले की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि औद्योगिक जमीनों के आवंटन और हस्तांतरण में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं।
जांच के दौरान अब JCT इलेक्ट्रॉनिक्स की जमीन का मामला भी सामने आया है। ED ने संबंधित विभागों और अधिकारियों से जमीन सौदे से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं, ताकि पूरे मामले की प्रक्रिया और निर्णयों की समीक्षा की जा सके।
मोहाली की 31 एकड़ जमीन पर उठे सवाल
जांच के केंद्र में मोहाली स्थित JCT इलेक्ट्रॉनिक्स की 31 एकड़ जमीन है। यह जमीन पहले औद्योगिक इकाई के रूप में इस्तेमाल होती थी, लेकिन बाद में कंपनी के बंद होने के बाद इसके भविष्य को लेकर निर्णय लिया गया।
आरोप है कि इस जमीन को एक निजी बिल्डर को बेचने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुईं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जमीन का मूल्यांकन और बिक्री प्रक्रिया राज्य के हितों के अनुरूप नहीं थी, जिसके कारण सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था सौदा
यह जमीन सौदा पिछली कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था। उस समय सुंदर श्याम अरोड़ा उद्योग मंत्री थे।
ED अब यह जांच कर रही है कि सौदे को मंजूरी देने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें शामिल विभागीय अधिकारियों की भूमिका क्या रही। एजेंसी सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
100 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान का आरोप
मामले में आरोप लगाया गया है कि JCT जमीन सौदे से पंजाब सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। आरोपों के मुताबिक, जमीन का सौदा वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी हितों को ध्यान में रखे बिना किया गया।
हालांकि, इस मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ED दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित फैसलों की समीक्षा कर रही है।
दस्तावेजों और फैसलों की होगी जांच
ED की जांच में अब जमीन हस्तांतरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल होंगे। इनमें जमीन का मूल्यांकन, बिक्री की शर्तें, सरकारी मंजूरी, फाइल नोटिंग और संबंधित विभागों के बीच हुए पत्राचार की जांच की जा सकती है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि जमीन बिक्री से जुड़े फैसले किस आधार पर लिए गए और क्या प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति या संस्था को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
PSIEC की भूमिका पर भी नजर
PSIEC पंजाब में औद्योगिक विकास और औद्योगिक प्लॉट से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में ED इस बात की जांच कर रही है कि निगम की ओर से जमीन आवंटन और हस्तांतरण की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
जांच का उद्देश्य केवल एक जमीन सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक जमीनों से जुड़े पूरे तंत्र की समीक्षा करना भी माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
ED की कार्रवाई के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार और पूर्व सरकारों पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि संबंधित पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क दिए जाते रहे हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच ED की जांच अब दस्तावेजी साक्ष्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ रही है।
आगे बढ़ सकती है कार्रवाई
जांच एजेंसी आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। यदि जांच में कोई वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो ED आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल एजेंसी का फोकस जमीन सौदे से जुड़े रिकॉर्ड जुटाने और पूरे घटनाक्रम को समझने पर है।
कुल मिलाकर, PSIEC के कथित औद्योगिक प्लॉट आवंटन घोटाले की जांच अब JCT इलेक्ट्रॉनिक्स की 31 एकड़ जमीन तक पहुंच गई है। ED द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद इस मामले में नई गतिविधियां तेज हो गई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन सौदे में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।





