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Punjab पंजाब: शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट्स में हो रही देरी और निरस्तीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह संकट सरकार की लापरवाही और नियामक प्रक्रियाओं की उपेक्षा का परिणाम है। प्रियंका ने सवाल उठाया कि दो साल पहले लागू किए गए नियमों के बावजूद इंडिगो पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, रिकॉर्ड क्यों नहीं बनाए गए और अपडेट क्यों नहीं किए गए। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एयरलाइन संचालन से जुड़े ये नियम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे, लेकिन अब इंडिगो ने हजारों फ्लाइट्स निरस्त कर दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में सरकार को दबाव में डालकर दिशानिर्देशों को वापस लेने के लिए मजबूर किया गया, जो एयरलाइन सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने आगे कहा, "सरकार की यह लापरवाही सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करती है। जब नियम लागू किए गए थे, तो उनका उद्देश्य सिर्फ एयरलाइन संचालन को नियंत्रित करना ही नहीं था, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था। लेकिन अब नियमों की अनदेखी और इंडिगो की शिथिलता ने लाखों यात्रियों को परेशानी में डाल दिया है।"
प्रियंका ने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की और कहा कि इंडिगो जैसी एयरलाइन को कोई भी नियम तोड़ने या अनदेखा करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस को अपने संचालन में पारदर्शिता लानी होगी और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।
सांसद ने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अब भी इस पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो इसका न केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा बल्कि यात्रियों का विश्वास भी हिल जाएगा। प्रियंका ने कहा कि यात्रियों के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी एयरलाइन को अपने मुनाफे के लिए सुरक्षा मानकों को दरकिनार करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो जैसी एयरलाइन का यह क़दम भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए चेतावनी की तरह है। एयरलाइन ऑपरेशन के नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना सभी एयरलाइंस की जिम्मेदारी है। नियमों की अनदेखी यात्रियों के जीवन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। प्रियंका चतुर्वेदी के इस बयान के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है और इंडिगो एयरलाइंस के खिलाफ कार्रवाई करती है या नहीं।
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