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मास्टर प्लान 2031 में बड़े बदलाव की तैयारी आज शाह की अहम बैठक

nidhi
3 Sept 2026 10:47 AM IST
मास्टर प्लान 2031 में बड़े बदलाव की तैयारी आज शाह की अहम बैठक
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मंथन शाह की बैठक में होंगे अहम फैसले

चंडीगढ़: देश के सबसे योजनाबद्ध शहरों में शामिल चंडीगढ़ के भविष्य को लेकर गुरुवार को दिल्ली में बड़ी बैठक होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों के साथ शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मुद्दों पर मंथन होगा। बैठक में लिए जाने वाले फैसले आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ के विकास, संपत्ति व्यवस्था और नगर प्रशासन की दिशा तय कर सकते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से शहर में बढ़ती आबादी, सीमित जमीन और बदलती जरूरतों को देखते हुए मास्टर प्लान में बदलाव की संभावनाओं पर काम कर रहा है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को गृह मंत्री के सामने रखेंगे।

मास्टर प्लान में बदलाव सबसे बड़ा मुद्दा
बैठक के एजेंडे में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधन शामिल हैं। शहर में जमीन सीमित होने और आबादी का दबाव बढ़ने के कारण चुनिंदा इलाकों में जमीन का अधिक प्रभावी उपयोग करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए Floor Area Ratio यानी FAR बढ़ाने और कुछ क्षेत्रों में अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को अनुमति देने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और योजनाबद्ध पहचान को देखते हुए किसी भी बड़े बदलाव से पहले उसके प्रभाव का अध्ययन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन इलाकों में बढ़ सकता है FAR
प्रस्तावित बदलावों में विशेष रूप से Phase-III के सेक्टरों, औद्योगिक क्षेत्रों और शहर के बाहरी हिस्सों में FAR बढ़ाने और भवनों की ऊंचाई से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार किया गया है। Phase-III में मुख्य रूप से सेक्टर-47 से आगे के क्षेत्र आते हैं। इन इलाकों में भविष्य की आवासीय जरूरतों को देखते हुए ज्यादा निर्माण क्षमता उपलब्ध कराने की संभावना तलाशी जा रही है। इसके अलावा नए ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में न्यूनतम चार मंजिला निर्माण जैसे प्रस्ताव भी चर्चा का हिस्सा रहे हैं।
हेरिटेज सेक्टरों को लेकर अतिरिक्त सावधानी
चंडीगढ़ के सेक्टर-1 से सेक्टर-30 तक के Phase-I क्षेत्र शहर की मूल योजना और हेरिटेज पहचान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी कारण इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निर्माण नियमों में बदलाव करने के बजाय शहर की मूल वास्तुकला और लो-राइज स्वरूप को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। चंडीगढ़ की पहचान 'Sun, Space and Verdure' यानी धूप, खुली जगह और हरियाली की अवधारणा से जुड़ी है। इसलिए मास्टर प्लान में किसी भी बदलाव के दौरान इस मूल चरित्र को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
पहले कराया जाएगा असर का अध्ययन
हाल ही में मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कमेटी ने कहा है कि शहर में बड़े पैमाने पर निर्माण घनत्व बढ़ाने से पहले भूकंप और आपदा जोखिम, यातायात, मौजूदा बुनियादी ढांचे की क्षमता, पर्यावरण, पार्किंग और मोबिलिटी से संबंधित अध्ययन किए जाने चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ज्यादा निर्माण की अनुमति देने से पानी, बिजली, सीवरेज, सड़क और पार्किंग जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं पर असहनीय दबाव न पड़े।
लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड का मुद्दा भी अहम
बैठक में चंडीगढ़ की औद्योगिक और व्यावसायिक लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी चर्चा होने की संभावना है। शहर के व्यापारी और उद्योग जगत से जुड़े संगठन काफी समय से इस बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लीजहोल्ड व्यवस्था के कारण संपत्ति के हस्तांतरण और दूसरे कामों में कई तरह की व्यावहारिक समस्याएं आती हैं। अगर केंद्र की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो शहर के बड़ी संख्या में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति मालिकों पर इसका असर पड़ सकता है।
पुनर्वास कॉलोनियों को मालिकाना हक
चंडीगढ़ की विभिन्न पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना अधिकार देने का मुद्दा भी बैठक के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल बताया जा रहा है। यह मामला लंबे समय से लंबित है। शहर में बड़ी संख्या में परिवार पुनर्वास योजनाओं के तहत आवंटित मकानों में रह रहे हैं और मालिकाना अधिकार की मांग करते रहे हैं। सरकार की मंजूरी मिलने की स्थिति में इन परिवारों के लिए संपत्ति से जुड़े अधिकारों की स्थिति बदल सकती है।
लाल डोरा पर भी हो सकता है फैसला
चंडीगढ़ के 22 गांवों में लाल डोरा समाप्त करने और इसके बाहर हुए निर्माण को लेकर भी प्रशासन लंबे समय से समाधान तलाश रहा है। इस मुद्दे पर पहले भी गृह मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के बीच चर्चा हो चुकी है। गांवों में बढ़ती आबादी और निर्माण के कारण पुराने लाल डोरा नियमों में बदलाव की मांग की जाती रही है। इस संबंध में किसी बड़े फैसले का असर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों पर पड़ सकता है।
शेयर-वाइज प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का मुद्दा
चंडीगढ़ में शेयर-वाइज संपत्तियों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री का मुद्दा भी काफी समय से चर्चा में है। प्रशासन इस मामले में कानूनी और नीतिगत पहलुओं को देखते हुए समाधान तलाश रहा है। बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है। संपत्ति से संबंधित इन फैसलों का शहर के रियल एस्टेट बाजार पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
मेयर का कार्यकाल बढ़ाने पर भी मंथन
गुरुवार की बैठक केवल मास्टर प्लान और संपत्ति मामलों तक सीमित नहीं रहने वाली है। चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले महीनों में नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर के कार्यकाल से संबंधित कोई फैसला शहर की स्थानीय राजनीति और नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
पहले टल चुकी है बैठक
चंडीगढ़ से जुड़े इन मुद्दों पर गृह मंत्री की अध्यक्षता में बैठक पहले जून में प्रस्तावित थी लेकिन बाद में उसे स्थगित कर दिया गया था। इससे पहले गृह मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के स्तर पर कई प्रस्तावों पर चर्चा हो चुकी है। अब अमित शाह की अध्यक्षता वाली बैठक में इन्हें उच्च स्तर पर रखा जा रहा है।
चंडीगढ़ के भविष्य के लिए अहम बैठक
चंडीगढ़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी विश्व प्रसिद्ध योजनाबद्ध और हेरिटेज पहचान को सुरक्षित रखते हुए भविष्य की आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करना है। एक तरफ शहर की आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में प्रशासन का जोर चुनिंदा क्षेत्रों में वर्टिकल ग्रोथ और जमीन के बेहतर उपयोग पर है। हालांकि किसी भी बड़े बदलाव से पहले यातायात, पानी, बिजली, सीवरेज, पर्यावरण, पार्किंग और आपदा जोखिम जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा। दिल्ली में होने वाली अमित शाह की बैठक इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मास्टर प्लान-2031 में बदलाव से लेकर फ्रीहोल्ड संपत्ति, पुनर्वास कॉलोनियों के मालिकाना अधिकार, लाल डोरा और नगर निगम प्रशासन तक कई बड़े मुद्दे एक साथ मेज पर होंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इनमें से किन प्रस्तावों को केंद्र की मंजूरी मिलती है और चंडीगढ़ के भविष्य के विकास की नई रूपरेखा कैसी बनती है।
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