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Punjab.पंजाब: पंजाब में GMADA (Greater Mohali Area Development Authority) द्वारा किए जा रहे ज़मीन अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को शुक्रवार को राजनीतिक समर्थन मिला। अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रताप बाजवा ने किसानों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
प्रताप बाजवा ने कहा कि GMADA की योजना में किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित की जा रही है और यह किसानों के जीविकोपार्जन और उनके अधिकारों पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए और ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करना चाहिए।
किसानों ने कई दिनों से मोहलियों और आसपास के क्षेत्रों में धरने और प्रदर्शन किए हैं। उनका कहना है कि GMADA के प्रस्तावित प्रोजेक्टों के कारण उनकी खेती योग्य ज़मीनों और जीवनयापन के साधनों पर संकट उत्पन्न हो रहा है। प्रताप बाजवा के समर्थन से किसानों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देखने को मिला। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी आवाज़ को राजनीतिक स्तर पर उठाया जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रताप बाजवा ने संवाददाताओं से कहा कि किसानों के हक़ में आवाज़ उठाना हर राजनीतिक नेता की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करें और किसी भी तरह की हिंसा से बचें। उन्होंने कहा कि उनका दल किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकारी स्तर पर भी कदम उठाएगा।
स्थानीय किसानों ने प्रताप बाजवा की उपस्थिति और उनके समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक समर्थन से उनकी लड़ाई को मजबूती मिली है और अब वे आश्वस्त हैं कि उनकी चिंताओं को अनदेखा नहीं किया जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि GMADA की योजनाओं में सुधार और उचित मुआवज़े के बिना किसी भी तरह की ज़मीन अधिग्रहण प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस मौके पर प्रताप बाजवा ने कहा कि पंजाब की राजनीति का मूल आधार किसान हैं और उनके हितों की रक्षा करना प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि किसानों के साथ समन्वय करके ऐसे उपाय किए जाएँ जिससे ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया न्यायसंगत और पारदर्शी हो।
इस समर्थन से GMADA के ज़मीन अधिग्रहण विरोध आंदोलन को नई दिशा मिली है। किसान अब और संगठित होकर अपनी मांगों को सरकार और संबंधित एजेंसियों तक पहुँचाने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक समर्थन होने से आंदोलन को बढ़ावा मिलेगा और अधिकारियों पर किसानों के हितों के प्रति दबाव बढ़ेगा।
संक्षेप में, प्रताप बाजवा ने GMADA के ज़मीन अधिग्रहण विरोधी किसानों का समर्थन किया, उनकी चिंताओं को गंभीरता से उठाने का वादा किया और आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। इससे स्पष्ट होता है कि पंजाब में किसान और उनके हित राजनीतिक विमर्श का केंद्र बने हुए हैं और इस मामले में सरकार के लिए संतुलित निर्णय लेना आवश्यक होगा।
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