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Punjab.पंजाब: पंजाब के बिजली विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर बिजली और ऊर्जा मामलों के मंत्री संजीव अरोड़ा को पद से हटाने की अपील की है। यह कदम बिजली विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बढ़ती नाराज़गी को दर्शाता है।
इंजीनियरों का आरोप है कि मंत्री अरोड़ा के कार्यशैली और फैसलों के कारण बिजली विभाग की कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। पत्र में उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में देरी और कर्मचारियों के साथ असंगत व्यवहार के कारण विभाग में अनावश्यक तनाव उत्पन्न हुआ है।
एक वरिष्ठ इंजीनियर ने कहा, “हमारी मांग केवल विभाग की भलाई और बिजली सेवाओं की सुचारू रूप से संचालन के लिए है। यदि मंत्री को हटाया गया, तो विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों का मनोबल इस समय बेहद नीचे है और उनकी समस्याओं को सुनने में मंत्री की उदासीनता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस पत्र की गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करने की योजना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मंत्री या अधिकारी को हटाने की मांग तब उठती है जब उनके नेतृत्व में विभागीय कामकाज में बाधाएं उत्पन्न हों। यह मामला बिजली विभाग में पारदर्शिता, कर्मचारियों का मनोबल और जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक भी इस मुद्दे को बड़े ध्यान से देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल बिजली विभाग की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की कार्यशैली और मंत्रालय में प्रभावशाली नेतृत्व की क्षमता को भी परखने का मौका है।
इंजीनियरों ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वे किसी राजनीतिक कारण से यह अपील नहीं कर रहे, बल्कि केवल विभाग की कार्यकुशलता और जनता को बेहतर बिजली सेवाएं देने की चिंता के चलते यह कदम उठाया गया है।
बिजली विभाग में हाल के महीनों में कई परियोजनाओं में देरी और तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं, जिससे इंजीनियरों की नाराज़गी बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि समय पर सही कदम नहीं उठाया गया, तो इससे न केवल विभागीय काम प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता को बिजली आपूर्ति में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
अंततः, पंजाब के बिजली इंजीनियरों की यह अपील राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में एक नया विवाद खड़ा कर सकती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि वे इस मामले में कैसे संतुलन बनाएंगे और विभाग की समस्याओं का समाधान करेंगे।
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