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पंजाब में बीजेपी की बढ़ती सक्रियता से गरमाई राजनीति

Kiran
7 Nov 2026 4:21 PM IST
पंजाब में बीजेपी की बढ़ती सक्रियता से गरमाई राजनीति
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पंजाब में बीजेपी की प्रबल सक्रियता से गरमाई राजनीति, 2027 चुनाव से पहले गतिशीलता तेज
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कट्टरपंथियों ने नोबेल को गर्मा दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है पार्टी राज्य में अपना संगठन मजबूत करने और राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश में है। भाजपा की एकजुटता, नेताओं के दौरों और समितियों की बैठकों को लेकर पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी का फोकस अब केवल शहरी क्षेत्रों के बजाय सीमित इलाकों तक है, ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी मजबूती पर है। पंजाब में प्रमुख आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल राजनीतिक ताकतें हैं। ऐसे में बीजेपी के सामने राज्य में अपनी अलग पहचान और मजबूत जनाधार तैयार करने की चुनौती है। पार्टी की कोशिश है कि जनता से जुड़े गठबंधन और स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाया जाए पंजाब में उनकी राजनीतिक स्थिति बेहतर हो।
2027 विधानसभा चुनाव पर बीजेपी की नजर
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 होने वाले हैं। इसे देखते हुए बीजेपी ने अपने परिचितों को तेज करने पर जोर दिया है। पार्टी का मानना ​​है कि चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना जरूरी है, ताकि बूथ स्तर तक विचारधारा की सक्रियता बनी रहे। भाजपा की रणनीति में बूथ प्रबंधन, समिति अभियान, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर दिशानिर्देश का विस्तार महत्वपूर्ण है। पार्टी नेताओं की बैठकों में विधायकों को जनता के बीच अपनी राय और केंद्र सरकार की मंजूरी की जानकारी पर ज़ोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण पंजाब में पकड़ बनाने की चुनौती
पंजाब में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी झलक ग्रामीण इलाकों में अपना आधार मजबूत करना है। राज्य की राजनीति में किसानों और ग्रामीण जिलों की अहम भूमिका जारी है। कृषि, बीजाणु की खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य, सीचना और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे यहां बहस बहस को प्रभावित करते हैं। कृषि कानून को लेकर हुए किसान आंदोलन के बाद बीजेपी और किसानों के बीच तनाव देखने को मिला। ऐसे में पार्टी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास बहाली महत्वपूर्ण होगी। भाजपा की कोशिश है कि किसान, दलित, युवा और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद हो। स्थानीय सिद्धांतों को समझकर उनके समाधान से जुड़े विद्वानों को राजनीतिक सिद्धांतों में शामिल किया जा सकता है।
नशा एवं बेरोजगारी के मुद्दे पर फोकस
पंजाब में नशे की समस्या और बेरोजगारी पर लंबे समय से राजनीतिक चर्चा के प्रमुख विषय रहे हैं। बीजेपी इन एसोसिएशन को राज्य सरकार को घेरने की रणनीति अपनानी पड़ सकती है। राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर की कमी, नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को प्रोत्साहन देना जैसे विषय हैं, जिन पर आगामी चुनाव में राजनीतिक व्यवस्था के बीच विवाद तेज होने की संभावना है। पार्टी युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए रोजगार और विकास से जुड़े छात्रों को प्रमुखता से जोड़ने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
नशामुक्त पंजाब यात्रा से लेकर राजनीतिक सक्रियता तक बीजेपी ने नशे के मुद्दे को अपनी राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है। सितंबर 2026 में पार्टी ने 'नशामुक्त पंजाब यात्रा' निकाली, जिसके तहत चार अलग-अलग हिस्सों के माध्यम से राज्य के सभी 117 जिलों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। इन किताबों ने करीब 4,000 किमी की यात्रा की और 30 सितंबर को जालंधर में समापन हुआ। इस अभियान के तहत बीजेपी ने नशे की समस्या को राजनीतिक और सामाजिक क्षति बनाने की कोशिश की।
पार्टी के नेताओं ने नशे के कारोबार पर रोक लगा दी और युवाओं को असुरक्षित महसूस कराया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जालंधर में आयोजित महोत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बीजेपी का दावा है कि सत्ता में वह नशे की समस्या के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करेगी। हालाँकि, यह मुद्दा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं।
जमीनी स्तर पर तैयारी के लिए संगठन को मजबूत बनाना
बीजेपी केवल बड़े राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं चाहती। पार्टी ने अपने संगठन को जिला, मंडल और बूथ स्तर तक सक्रिय करने की योजना बनाई है। 17 अक्टूबर 2026 को संगरूर में आयोजित राज्य सहकारी समिति की बैठक के बाद पार्टी ने शेयरधारकों को जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रदेश महासचिव अनिल सरीन के मुताबिक, पार्टी की 36वीं सहायक मंडल में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके बाद मंडल स्तर पर भी नैतिकता को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। बीजेपी ने नशे, नशे और अपराध को राज्य के प्रमुख स्कॉलरशिप के रूप में उभारने का फैसला किया है। पार्टी की कोशिश है कि संगठन के माध्यम से इन विषयों पर जनता के बीच संवाद स्थापित किया जाए
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