पंजाब

2027 चुनाव से पहले पंजाब में सियासी गर्मी, चन्नी ने किया गुप्त गठबंधन का दावा

Ratna Netam
25 Oct 2026 6:29 PM IST
2027 चुनाव से पहले पंजाब में सियासी गर्मी, चन्नी ने किया गुप्त गठबंधन का दावा
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चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस सांसद और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आरोप लगाया है कि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन पर्दे के पीछे गुप्त रूप से जारी रहा। उनके बयान ने दोनों दलों के पुराने राजनीतिक संबंधों और आगामी चुनावों से पहले संभावित गठजोड़ को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।चन्नी का आरोप ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने का दावा किया है। शाह के इस बयान के बाद भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन होने की अटकलों को बल मिला है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अब तक किसी औपचारिक चुनावी गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है।
अकाली दल और भाजपा के पुराने रिश्ते फिर चर्चा में
शिरोमणि अकाली दल और भाजपा लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने मिलकर राज्य में सरकार भी चलाई थी। हालांकि, केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन के दौरान सितंबर 2020 में अकाली दल ने भाजपा से अपना गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद दोनों दलों ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ा।अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच संभावित नजदीकी की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक चर्चाओं के बीच चन्नी ने आरोप लगाया है कि दोनों दलों के बीच संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए थे और उनका गठजोड़ किसी न किसी रूप में जारी रहा।हालांकि, चन्नी के आरोपों के समर्थन में किसी गोपनीय समझौते का सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे कांग्रेस सांसद का राजनीतिक आरोप ही माना जाना चाहिए।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी गठबंधन की चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दावा किया कि आगामी चुनाव के बाद पंजाब में NDA की सरकार बनेगी। उनके इस बयान को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शाह ने अपने बयान में किसी औपचारिक सीट-बंटवारे की घोषणा नहीं की थी।दूसरी ओर, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि उनकी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को छोड़कर समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। इस बयान को भी भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समझौते के संदर्भ में देखा जा रहा है।इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में यह सवाल अहम हो गया है कि क्या दोनों पूर्व सहयोगी 2027 के चुनाव में फिर एक साथ मैदान में उतरेंगे या अपने-अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस ने उठाए राजनीतिक सवाल
चरणजीत सिंह चन्नी के आरोपों को कांग्रेस की उस रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, जिसके तहत पार्टी भाजपा और अकाली दल के पुराने संबंधों को चुनावी बहस में प्रमुखता दे रही है। कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अभी से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन पर अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों पार्टियां सीटों के बंटवारे और साझा चुनावी रणनीति पर सहमत हो पाती हैं या नहीं।
2027 के चुनाव से पहले गठबंधन पर नजर
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है। एक तरफ भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने और सभी 117 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात करती रही है, तो दूसरी ओर अकाली दल ने भी समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन का विकल्प खुला रखा है।फिलहाल, चन्नी के आरोप और अमित शाह के बयान के बाद अकाली दल-भाजपा गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों दल अपने संबंधों को लेकर क्या आधिकारिक रुख अपनाते हैं और क्या आगामी चुनाव से पहले किसी औपचारिक समझौते की घोषणा होती है।
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