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जिनमें दावा किया गया कि शुक्रवार आधी रात को 'खालिस्तान कमांडो फोर्स' (KCF) के सदस्यों ने डिप्टी कमिश्नर (DC) के दफ्तर पर हैंड ग्रेनेड फेंका। इस दावे से काफी भ्रम फैल गया और पुलिस को तलाशी अभियान चलाना पड़ा, जबकि पुलिस ने साफ कहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है।
वहां कोई धमाका नहीं हुआ, न ही कोई चश्मदीद सामने आया और वीडियो से यह भी साफ नहीं हो पाया कि कथित हमला असल में कहां हुआ था। SP मनिंदर सिंह की देखरेख में पुलिस टीमों ने पूरे इलाके की तलाशी ली, लेकिन उन्हें वहां धमाके का कोई निशान, टुकड़े या कोई अन्य सबूत नहीं मिला।
SSP आदित्य ने बताया कि साइबर सेल को उन लोगों का पता लगाने का काम सौंपा गया है, जिन्होंने यह वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर अपलोड किया। उन्होंने इन दावों को एक शरारतपूर्ण अफवाह बताया, जिसका मकसद राज्य में दहशत फैलाना और शांति भंग करना था।
सोशल मीडिया पर KCF के नाम से एक और पोस्ट भी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि पुलिस द्वारा उनके सदस्यों के साथ की गई ज्यादती के कारण यह हमला किया गया। हालांकि, इस पोस्ट की सच्चाई अभी तक साबित नहीं हो पाई है। गैंगस्टर निशान सिंह जौरियन और आदेशबीर सिंह उर्फ आदेश जमारे ने भी इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, लेकिन इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इस इलाके में हाल ही में ग्रेनेड हमलों की कई घटनाएं हुई हैं। 24 सितंबर को हरमनजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि 27 अप्रैल को गुरदासपुर में गीता भवन रोड के पास हुए हैंड ग्रेनेड हमले में वह शामिल था।
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