पंजाब

हॉकी से राजनीति तक परगट सिंह

Kavita2
3 Oct 2026 12:17 PM IST
हॉकी से राजनीति तक परगट सिंह
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चंडीगढ़। भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी से लेकर पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने तक परगट सिंह का सफर खेल और राजनीति का दिलचस्प संगम है। पूर्व ओलंपियन परगट सिंह को कांग्रेस ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। जालंधर कैंट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए परगट सिंह ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह ली है। यह बदलाव 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है।

परगट सिंह का नाम राजनीति में आने से काफी पहले भारतीय हॉकी में स्थापित हो चुका था। जालंधर के मिट्ठापुर में जन्मे परगट ने कम उम्र में हॉकी खेलना शुरू किया और आगे चलकर भारतीय टीम के प्रमुख डिफेंडर बने। उन्होंने 1983 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण किया और इसके बाद लंबे समय तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।

परगट सिंह ने तीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह 1988 के सियोल ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा थे। इसके बाद 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की। विश्व कप सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी वह भारत की ओर से मैदान पर उतरे।

हॉकी के मैदान पर उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान भी मिले। परगट सिंह को 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने के बाद भी उनका खेल से रिश्ता खत्म नहीं हुआ और वह अलग-अलग भूमिकाओं में हॉकी से जुड़े रहे।

खेल के मैदान पर लंबी पारी खेलने के बाद परगट सिंह ने राजनीति की तरफ कदम बढ़ाया। उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति की शुरुआत 2012 में हुई। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसी जीत के साथ पंजाब की राजनीति में उनकी नई पारी शुरू हुई।

इसके बाद उनके राजनीतिक सफर में बड़ा बदलाव आया। अकाली दल से अलग होने के बाद वह 2016 में कांग्रेस में शामिल हो गए। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें जालंधर कैंट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने सीट पर दोबारा जीत दर्ज की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह इसी सीट से विजयी रहे। इस तरह परगट सिंह 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।

कांग्रेस सरकार के दौरान परगट सिंह को मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली। चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में वह शिक्षा और खेल सहित विभिन्न विभागों के मंत्री रहे। इसके अलावा वह कांग्रेस संगठन में भी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। खेल प्रशासन और राजनीति दोनों क्षेत्रों में काम करने का अनुभव अब उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नए दायित्व के साथ जुड़ गया है।

कांग्रेस ने शुक्रवार को उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की गई। इससे कुछ समय पहले अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने प्रदेश अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। वडिंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे।

परगट सिंह को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। कांग्रेस के सामने प्रदेश संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने, अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और जमीनी संगठन को सक्रिय करने की जिम्मेदारी है। पार्टी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों से जुड़े फैसलों में भी प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में परगट सिंह के सामने संगठन के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। हालांकि पार्टी की आंतरिक रणनीति और भविष्य के नेतृत्व संबंधी फैसले कांग्रेस नेतृत्व को करने हैं।

परगट सिंह की राजनीतिक पहचान जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र से मजबूती से जुड़ी हुई है। लगातार तीन चुनाव जीतने के कारण वह पंजाब विधानसभा में लंबे समय से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनकी नई जिम्मेदारी अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें पूरे पंजाब में कांग्रेस संगठन की कमान संभालनी होगी।

हॉकी के मैदान पर परगट सिंह डिफेंडर के रूप में पहचाने जाते थे। भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। खेल से राजनीति में आने के बाद भी उनका सार्वजनिक जीवन लगातार सक्रिय रहा। विधायक, मंत्री और संगठन में जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष का पद उनके राजनीतिक सफर का नया पड़ाव है।

उनकी नियुक्ति के साथ कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बाद प्रदेश इकाई की कमान ऐसे नेता को दी गई है, जिसकी पहचान खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों से जुड़ी हुई है।

परगट सिंह के सामने अब चुनावी तैयारियों को गति देने के साथ संगठन को एकजुट रखने की जिम्मेदारी होगी। पंजाब कांग्रेस में कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता मौजूद हैं और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्हें इन नेताओं तथा जिला और ब्लॉक स्तर के संगठन के साथ तालमेल बनाकर काम करना होगा।

हॉकी के मैदान पर भारत की कप्तानी करने वाले परगट सिंह ने करीब डेढ़ दशक पहले चुनावी राजनीति में कदम रखा था। 2012 में पहली बार विधायक बनने से लेकर लगातार तीन चुनाव जीतने, मंत्री बनने और अब पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त होने तक उनका राजनीतिक सफर कई पड़ावों से गुजरा है।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले परगट सिंह की भूमिका पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। खेल के मैदान पर टीम की कप्तानी कर चुके परगट के सामने इस बार चुनौती पंजाब कांग्रेस के संगठन का नेतृत्व करने की है। पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है और आने वाले महीनों में उनकी प्राथमिकताएं तथा संगठनात्मक फैसले पंजाब कांग्रेस की चुनावी तैयारियों की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में शामिल होंगे।

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