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भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन बरामद तीन पिस्तौल की मैगजीन भी मिलीं

Kavita2
11 Sept 2026 1:23 PM IST
भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन बरामद तीन पिस्तौल की मैगजीन भी मिलीं
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गुरदासपुर : भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन और तीन पिस्तौल की मैगजीन बरामद की हैं। यह कार्रवाई सीमा सुरक्षा बल के गुरदासपुर सेक्टर के अंतर्गत आने वाली 113वीं बटालियन की बसंतर सीमा चौकी के क्षेत्र में की गई। ड्रोन के साथ हथियारों से जुड़ी सामग्री मिलने के बाद सीमा पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों को आसमान में संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि दिखाई दी। जवानों ने तुरंत निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी। सीमा पर लगाए गए ड्रोन रोधी उपकरणों की जद में भी संदिग्ध उड़ने वाली वस्तु की गतिविधि दर्ज की गई। इसके बाद जवानों ने संभावित स्थानों को चिह्नित करते हुए भारतीय सीमा क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया।

रात का समय होने और सीमावर्ती क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने निगरानी जारी रखी। ड्रोन की दिशा और उसकी संभावित उड़ान वाले इलाके पर विशेष ध्यान दिया गया। जवानों को आशंका थी कि ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में कोई संदिग्ध पैकेट या प्रतिबंधित सामान गिराया गया हो सकता है। इसी आशंका के आधार पर संबंधित क्षेत्र में सघन तलाशी शुरू की गई।

तलाशी के दौरान जवानों ने भारतीय सीमा क्षेत्र से एक पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किया। उसके आसपास की जांच करने पर तीन पिस्तौल की मैगजीन भी मिलीं। बरामद सामग्री को सुरक्षा बल ने अपने कब्जे में ले लिया। ड्रोन की तकनीकी जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि उसे किस स्थान से उड़ाया गया था और भारतीय क्षेत्र में उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।

ड्रोन के साथ पिस्तौल की मैगजीन मिलने से सीमा पार से हथियारों की तस्करी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, बरामदगी के पीछे किस व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी। यह भी देखा जाएगा कि ड्रोन के माध्यम से केवल मैगजीन गिराई गई थीं या उसके साथ कोई अन्य सामान भी भेजा गया था। पूरे इलाके की दोबारा तलाशी लेकर सभी संभावित साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है।

बीएसएफ के जवानों ने बरामद ड्रोन की बनावट, क्षमता और तकनीकी उपकरणों का प्रारंभिक निरीक्षण किया है। विस्तृत जांच में ड्रोन की मेमोरी, उड़ान से जुड़े रिकॉर्ड और उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विश्लेषण महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे यह जानकारी मिलने की संभावना है कि ड्रोन किस दिशा से आया और उसने सीमा के भीतर कितनी दूरी तय की।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के माध्यम से हथियार, नशीले पदार्थ और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भेजने के प्रयास सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। छोटे आकार के ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और रात के समय उनकी पहचान अपेक्षाकृत कठिन होती है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में आधुनिक ड्रोन रोधी उपकरणों के साथ मानवीय निगरानी भी लगातार रखी जाती है।

बसंतर सीमा चौकी पर तैनात जवानों की सतर्कता से संदिग्ध ड्रोन को समय रहते पहचान लिया गया। यदि ड्रोन के जरिए मैगजीन किसी स्थानीय व्यक्ति या तस्कर तक पहुंचाने की कोशिश की गई थी तो इस बरामदगी ने उस योजना को विफल कर दिया। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि सीमा के इस तरफ किसी व्यक्ति को सामग्री लेने के लिए भेजा गया था या नहीं।

जांच के दौरान आसपास के गांवों, संपर्क मार्गों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। सीमा क्षेत्र में लगे निगरानी उपकरणों और उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया जाएगा। घटना के समय ड्रोन की आवाजाही किस दिशा में थी और वह कहां गिरा, इन जानकारियों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास होगा।

पिस्तौल की बरामद मैगजीन की भी जांच कराई जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वे किस प्रकार की पिस्तौल में इस्तेमाल की जाती हैं। मैगजीन पर मौजूद किसी निशान, संख्या या अन्य पहचान के आधार पर उनके स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है। यह भी जांच का विषय रहेगा कि इन मैगजीन के साथ हथियार या कारतूस भेजने की योजना थी अथवा ड्रोन का कोई दूसरा हिस्सा अभी क्षेत्र में मौजूद है।

घटना के बाद सीमा पर गश्त तेज कर दी गई है। जवानों को रात के समय विशेष सतर्कता बरतने और आसमान में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील हिस्सों में ड्रोन रोधी व्यवस्था के साथ अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि सीमा पार से होने वाले किसी अन्य प्रयास को रोका जा सके।

सुरक्षा अधिकारियों के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि ड्रोन को सीमा पार से नियंत्रित किया जा रहा था या वह पहले से तय किए गए रास्ते पर उड़ रहा था। कई आधुनिक ड्रोन जीपीएस आधारित निर्धारित मार्ग पर उड़ सकते हैं और तय स्थान पर सामान गिराने के बाद वापस लौट सकते हैं। तकनीकी जांच में इन सभी संभावनाओं पर गौर किया जाएगा।

सीमा सुरक्षा बल सीमावर्ती नागरिकों से भी लगातार अपील करता है कि किसी संदिग्ध ड्रोन, पैकेट या अनजान वस्तु के दिखाई देने पर उसे छूने के बजाय तुरंत नजदीकी बीएसएफ चौकी या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। समय पर मिली जानकारी से तस्करी और सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों को रोकने में सहायता मिल सकती है।

फिलहाल ड्रोन और तीनों पिस्तौल मैगजीन को कब्जे में लेकर आगे की जांच की जा रही है। इस बरामदगी से सीमा पार से संभावित हथियार तस्करी की कोशिश नाकाम हुई है। 113वीं बटालियन के जवानों की सतर्कता ने एक बार फिर साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और लगातार निगरानी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।

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