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Punjab पंजाब : श्री मुक्तसर साहिब में ओवरलोड वाहनों की समस्या गंभीर है जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। यातायात नियमों के उल्लंघन के कारण सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।
शहर के कई मार्गों पर ओवरलोड वाहन दिन-रात दौड़ रहे हैं जिससे राहगीरों को परेशानी हो रही है। जलालाबाद रोड पर खड़े ट्रक भी हादसों का कारण बन सकते हैं। ओवरलोडिंग के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। वाहन चालकों की मनमानी के चलते दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन बावजूद ट्रांसपोर्ट विभाग और जिला पुलिस इन पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहे हैं। शहर की सड़कों पर ओवरलोड वाहन मौत बन कर दौड़ रहे हैं। दिन में शहर क्षेत्र में यह ओवरलोड वाहन गुजर रहे हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है।
कई बार लोग ओवरलोड वाहनों के कारण मौत के आगोश में चले गए हैं। फिर भी इन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होने से हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। सड़क हादसों के करीब 75 से 80 प्रतिशत मामले यातायात नियमों के पालन नहीं किए जाने के कारण सामने आते हैं, वहीं यातायात व्यवस्था का पालन नही करने के कारण खामियाजा उठाना पड़ता है। इस कारण शहर से चलने वाले विभिन्न रूटों पर अनेक ऐसे वाहन भी दौड़ रहे हैं, जिन्हें सड़कों पर नहीं होना चाहिए। शहर के मलोट रोड, कोटकपूरा रोड, बठिंडा रोड, अबोहर रोड सहित अन्य मार्गों ऐसे हैं जहां ओवरलोड वाहन दिन और रात के समय भी दौड़ते हैं जिन पर कोई रोक-टोक नहीं की जा रही। इन ओवरलोड वाहन से हादसा होने को डर रहता है। इसके साथ ही सामने से आ रहे वाहन चालकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रात के समय दोपहिया वाहन चालकों को ओवरलोड वाहन के साइड से निकालने में खतरा महसूस होता है। तूड़ी से भरे वाहनों पर रिफ्लेक्टर या खतरे का सूचक या लाइट भी नहीं लगी होती। इस कारण दोपहिया व अन्य वाहन से दुर्घटना ओवरलोड वाहन साइड देने में आनाकानी करते हैं। कई बार तो सड़क पर दो ओवरलोड वाहन रोड को घेरते हुए चलते हैं, जिस कारण पीछे से आने वाले चालक को परेशानी होती है। इन वाहनों पर पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर रही है। जलालाबाद रोड पर खड़े किए ट्रकों का कोई हल नहीं जलालाबाद रोड के किनारे ट्रक खड़े किए जा रहे हैं जिनसे अकसर हादसे का डर बना रहता है। यह मामला आरटीए के समक्ष भी उठा। उन्होंने रोड सेफ्टी कमेटी को तुरंत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला। अभी भी वहां पर ट्रक खड़े किए जा रहे हैं। करीब दो माह पहले आरटीए ने आश्वासन दिया था
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