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Chandigarh चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार पर पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में बादल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी ऐतिहासिक रूप से और प्रशासनिक तौर पर पंजाब की है और इस पर किसी भी तरह का केंद्र का अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाबी जनता अपने अधिकारों पर किसी भी प्रकार की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगी। बादल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी कोई साझा संसाधन नहीं है, बल्कि पंजाब सरकार की अपनी यूनिवर्सिटी है। “देश के बाकी राज्यों ने अपना हिस्सा लेकर अपनी-अपनी यूनिवर्सिटियां स्थापित कर ली हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी से 200 से अधिक कॉलेज पंजाब में ही संबद्ध हैं। ऐसे में यह कहना कि PU केंद्र के तहत आए, पूरी तरह गलत है,” उन्होंने कहा।
अकाली दल अध्यक्ष ने चंडीगढ़ प्रशासन की हालिया भर्ती नीतियों पर भी कड़ा विरोध जताया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार धीरे-धीरे चंडीगढ़ की भर्ती नीति को इस तरह बदल रही है कि पंजाब और हरियाणा के अभ्यर्थियों को सेवा अवसरों से बाहर किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह न केवल संघीय ढांचे के खिलाफ है, बल्कि पंजाब के युवाओं के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है। “वे चंडीगढ़ की प्रशासनिक सेवाओं में पंजाब और हरियाणा के युवाओं को आवेदन तक नहीं करने दे रहे। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है,” बादल ने जोर देकर कहा। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को भी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की चुपचाप की जाने वाली नीति बदलाव या ‘टेकओवर’ की कोशिश को पंजाब की जनता कड़ा जवाब देगी। बादल ने साफ कहा कि SAD इस मुद्दे पर मैदान में उतरेगा और किसी भी कीमत पर पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और पंजाब के अधिकारों की रक्षा करेगा।
सुखबीर बादल ने केंद्र पर आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में प्रशासनिक ढांचे और संस्थानों पर धीरे-धीरे कब्जा करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। उन्होंने कहा, “यह पंजाब की भावना और संवैधानिक अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है। पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक, शैक्षणिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण स्तंभ है। अंत में, उन्होंने केंद्र को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अकाली दल और पंजाब के लोग मिलकर किसी भी प्रकार के अधिकार हनन का विरोध करेंगे और पंजाब यूनिवर्सिटी की मौजूदा संरचना और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
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