
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का सोमवार को आखिरी दिन है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सरकार की ओर से अंतिम दिन कुल नौ विधेयक पेश किए जाने हैं। वहीं, विपक्ष ने भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रखी है। सत्र के अंतिम दिन सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
सरकार की ओर से सोमवार को पेश किए जाने वाले विधेयकों में शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक भी शामिल है। मंत्री हरजोत बैंस ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक सदन में पेश किया। विधेयक पेश किए जाने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस पर अपने विचार रखे।
नौ विधेयक पेश करेगी सरकार
मानसून सत्र के अंतिम दिन पंजाब सरकार की ओर से कुल नौ विधेयक सदन के सामने लाए जाने हैं। इन विधेयकों को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अंतिम दिन होने के कारण विधायी कामकाज को तेजी से पूरा किए जाने की संभावना है।
सरकार इन विधेयकों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन और सुधार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सदन में विधेयकों को लेकर चर्चा और विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।
विपक्ष पहले से ही कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर रहा है। ऐसे में अंतिम दिन भी सदन में राजनीतिक गर्मी बनी रहने की संभावना है।
फीस नियंत्रण से जुड़ा विधेयक पेश
मंत्री हरजोत बैंस ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक सदन में पेश किया। यह विधेयक राज्य के गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की फीस से संबंधित है।
अनएडेड शिक्षण संस्थानों में फीस और उससे जुड़े नियमों को लेकर अभिभावकों और संस्थानों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। ऐसे में सरकार की ओर से लाया गया संशोधन विधेयक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधेयक पेश करते हुए मंत्री हरजोत बैंस ने इसके प्रावधानों को सदन के सामने रखा। इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस विषय पर सरकार का पक्ष रखा।
सीएम भगवंत मान ने रखे विचार
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फीस से जुड़े विधेयक पर अपने विचार रखे। सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा गया।
सरकार का जोर शिक्षा क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा पर रहा है। फीस से संबंधित नियमों में संशोधन के जरिए निजी शिक्षण संस्थानों की फीस व्यवस्था को लेकर सरकार अपनी नीति को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
आखिरी दिन भी विपक्ष आक्रामक
मानसून सत्र के आखिरी दिन विपक्ष का रुख भी आक्रामक नजर आया। विपक्षी दलों के सदस्यों ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। इससे सदन की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी रही।
विपक्ष की ओर से सरकार की नीतियों और विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अंतिम दिन होने के कारण विपक्ष भी अपनी मांगों और आरोपों को सदन में प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रहा है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी इस राजनीतिक खींचतान के चलते सदन की कार्यवाही पर सबकी नजर बनी हुई है।
विधायी कामकाज पर सरकार का जोर
सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रस्तावित सभी महत्वपूर्ण विधायी काम पूरे किए जाएं। नौ विधेयकों का पेश किया जाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधेयकों पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से सवाल और आपत्तियां उठाई जा सकती हैं। सरकार की ओर से इनका जवाब देकर विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
सत्र के अंतिम दिन सरकार के सामने एक ओर विधायी एजेंडा पूरा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के विरोध के बीच सदन की कार्यवाही सुचारु बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षा विधेयक पर नजर
हरजोत बैंस द्वारा पेश किए गए फीस संशोधन विधेयक पर विशेष रूप से नजर है। निजी स्कूलों और अन्य गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की फीस को लेकर अभिभावकों की चिंताएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं।
ऐसे में सरकार के इस विधेयक से शिक्षा क्षेत्र में फीस निर्धारण और उससे जुड़े नियमों में क्या बदलाव होंगे, यह महत्वपूर्ण विषय रहेगा। विधेयक पर सदन में होने वाली चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अंतिम दिन हंगामे के आसार
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का अंतिम दिन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। सरकार जहां नौ विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
ऐसे में सदन की कार्यवाही के दौरान बहस, विरोध और हंगामे की स्थिति बन सकती है। इसके बावजूद सरकार का प्रयास रहेगा कि निर्धारित विधायी कार्य पूरा किया जाए और सत्र को महत्वपूर्ण फैसलों के साथ समाप्त किया जाए।
सोमवार की कार्यवाही में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार नौ विधेयकों को किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष इन पर क्या रुख अपनाता है। वहीं, फीस संशोधन विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस की ओर से रखे गए विचार भी शिक्षा क्षेत्र में सरकार की आगामी नीति की दिशा को स्पष्ट कर सकते हैं।





