पंजाब

पराली रोकने की ड्यूटी के दौरान अफसर घायल, हमलावरों पर कार्रवाई के निर्देश

nidhi
30 Oct 2026 9:48 AM IST
पराली रोकने की ड्यूटी के दौरान अफसर घायल, हमलावरों पर कार्रवाई के निर्देश
x
पराली की आग रिकॉर्ड कर रहे अफसर पर हमला
तरनतारन: पंजाब के तरनतारन जिले में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करने पहुंचे क्लस्टर अधिकारी मनिंदर सिंह पर हमले का मामला सामने आया है। खडूर साहिब ब्लॉक में तैनात भूमि एवं जल संरक्षण अधिकारी मनिंदर सिंह गुरुवार, 29 अक्टूबर को कंग गांव में ड्यूटी कर रहे थे। आरोप है कि खेतों में लगी आग का वीडियो रिकॉर्ड करते समय उनके साथ मारपीट की गई, जिससे वह घायल होकर बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। दूसरी ओर, जिले में पराली जलाने के मामलों में 90 किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की खबर है। इन 90 किसानों पर दर्ज मामलों को अधिकारी पर हमले का मुकदमा नहीं समझा जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, मनिंदर सिंह को कई गांवों में पराली जलाने से रोकने और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। कंग गांव के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पांच स्थानों पर खेतों में आग देखी और उसका वीडियो बनाना शुरू किया। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनका विरोध किया और कथित तौर पर हमला कर दिया। मारपीट के बाद अधिकारी खेत में बेहोश होकर गिर पड़े। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग और गांव के सरपंच मौके पर पहुंचे।
घायल अधिकारी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया। खडूर साहिब के एसडीएम संजीव शर्मा ने घटना की पुष्टि की और उनका हाल जाना। डिप्टी कमिश्नर ने हमले की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, हमलावर की पहचान और गिरफ्तारी के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
हमले के मामले में प्राथमिकी की स्थिति को लेकर भी सावधानी जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस की शुक्रवार सुबह प्रकाशित रिपोर्ट में एसडीएम के हवाले से बताया गया कि उस समय तक औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी और पुलिस संदिग्ध की पहचान तथा विवरण की पुष्टि कर रही थी। वहीं, 90 किसानों के खिलाफ कार्रवाई की खबर जिले में पराली जलाने की घटनाओं से संबंधित है। दोनों घटनाक्रम अलग हैं। तरनतारन में पराली प्रबंधन को लेकर पहले से निगरानी बढ़ाई गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, यानी सीएक्यूएम की टीम ने 24 अक्टूबर को अमृतसर और तरनतारन के उपायुक्तों तथा संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। आयोग ने खेतों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और रोकथाम के प्रयास तेज करने को कहा था। तरनतारन में अधिक घटनाएं सामने आने के कारण इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे।
आयोग ने कार्रवाई के साथ किसानों तक पराली प्रबंधन के साधन समय पर पहुंचाने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों से कहा गया कि वे केवल मशीनों की उपलब्धता की जानकारी देने तक सीमित न रहें, बल्कि यह सुनिश्चित करें कि जरूरत के समय किसानों को उपकरण और सुविधाएं मिलें। इसके लिए किसानों, कस्टम हायरिंग केंद्रों, मशीन उपलब्ध कराने वालों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए। पराली के उपयोग को बढ़ाने के लिए ताप विद्युत संयंत्रों, ईंट-भट्ठों और उपयुक्त उद्योगों में उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर भी बल दिया गया है। आयोग का कहना है कि फसल अवशेषों का प्रबंधन खेत के भीतर और खेत के बाहर, दोनों स्तरों पर किया जाए। संबंधित क्षेत्रों के नोडल अधिकारियों को वास्तविक उपयोग की निगरानी और उसकी रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इससे पहले 10 अक्टूबर की समीक्षा में भी अमृतसर और तरनतारन को पराली जलाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया था। आयोग ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की समय पर उपलब्धता, किसानों को जानकारी देने और विभागों के बीच तालमेल पर जोर दिया था। पंजाब के 18 जिलों में एक अक्टूबर से 30 नवंबर तक उड़नदस्तों की तैनाती का उल्लेख भी आधिकारिक विज्ञप्ति में है। कंग गांव की घटना के बाद निगरानी में तैनात अधिकारियों की सुरक्षा का सवाल भी सामने आया है। फिलहाल घायल अधिकारी का उपचार और हमले से संबंधित कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की घटनाओं और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने को गंभीरता से लिया जाएगा।
Next Story