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Ludhiana बिहार के गया में रहने वाले नीरज के पंजाब जाने का सिर्फ़ एक ही मकसद था - जिस बुज़ुर्ग की वह देखभाल कर रहे थे, उन्हें उनके परिवार से मिलाना। शनिवार को जब नीरज, चमन लाल को लुधियाना के उनके गाँव फ़तेहगढ़ गुज्जरन लाए, तो वहाँ भावुक नज़ारे देखने को मिले। लाल के रिश्तेदारों ने राहत की सांस लेते हुए उन्हें गले लगाया, और उनके पोते ने नीरज के पैर छुए, क्योंकि उन्हें नीरज में "इंसानियत के ज़िंदा होने" का सबूत दिखा।
लाल, जिनकी याददाश्त कमज़ोर हो गई है, अमृतसर की तीर्थयात्रा के दौरान खो गए थे। वह पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत 11 सितंबर को स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेम्पल) गए थे। उनके परिवार के अनुसार, वह अपने ग्रुप से बिछड़ गए और बिहार जाने वाली ट्रेन में चढ़ गए, जिससे वह सैकड़ों किलोमीटर दूर गया पहुँच गए। गया में ही नीरज ने उन्हें घूमते हुए देखा और उन्हें लगा कि यह बुज़ुर्ग रास्ता भटक गया है। उन्होंने उनके परिवार का पता लगाने की ज़िम्मेदारी ली। वह लाल को अपने घर ले गए, जहाँ वह बुज़ुर्ग चार दिन तक रहे। नीरज ने कहा, "मैं बस उनके परिवार का पता लगाना चाहता था। मैंने उन्हें चार दिन तक (अपने घर पर) रखा। जब मैं घर से निकला (पंजाब के लिए), तो बस उन्हें किसी तरह उनके घर पहुँचाना चाहता था।"
पंजाब के लिए निकलने से पहले, नीरज ने इंटरनेट की मदद से लाल के गाँव फ़तेहगढ़ गुज्जरन का पता लगाया और उन्हें साथ ले जाने का फ़ैसला किया। इस बीच, लाल के पोते सुखचैन लापता बुज़ुर्ग की तलाश करते रहे। भावुक पोते ने कहा, "मैं 13 सितंबर को अमृतसर गया था। मैं वहाँ उन्हें ढूंढता रहा। मैंने हर गली में तलाशा लेकिन वह नहीं मिले। मैं आज ही वापस आया हूँ।"
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि पंजाब पहुँचे नीरज ने उनसे फ़तेहगढ़ गुज्जरन गाँव के बारे में पूछा। उस व्यक्ति ने लापता बुज़ुर्ग के बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखी थी और उन्हें तुरंत पहचान लिया। उन्होंने लाल के परिवार को फ़ोन किया, और वे उस जगह पहुँच गए। नीरज ने बताया कि कैसे उन्हें बिहार में लाल मिले और वह उन्हें वापस लाए। नीरज ने कहा कि लाल से परिवार के दोबारा मिलने पर वे अपनी आँसू नहीं रोक पाए, और भावनाओं के सैलाब के बीच उनकी अपनी आँखें भी भर आईं। सुखचैन ने उस अजनबी को गले लगाया, जिसने उनकी जान बचाई थी, और आभार जताते हुए उनके पैर छुए। उन्होंने कहा, "नीरज का बहुत-बहुत धन्यवाद। इससे पता चलता है कि इंसानियत अभी भी ज़िंदा है।"
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