
पंजाब: मनरेगा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोहाली स्थित विकास भवन पर प्रदर्शन किया। ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के अंतर्गत काम करने वाले मनरेगा कर्मचारियों ने बुधवार को बड़ी संख्या में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान वेतन नीति लागू करना, सेवा नियमों में एकरूपता लाना और कर्मचारियों को नियमित कर विभाग में शामिल करना शामिल रहा।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मचारियों के विकास भवन पहुंचने के बाद पुलिस ने भवन के दोनों मुख्य गेट बंद कर दिए। जब कर्मचारियों ने अंदर जाने का प्रयास किया तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने वहीं धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
इस प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। मनरेगा कर्मचारी यूनियन पंजाब के नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नौकरी की सुरक्षा और उचित वेतन का लाभ नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार काम करने के बावजूद उनकी सेवा स्थिति अस्थिर बनी हुई है।
मनरेगा कर्मचारी यूनियन के प्रधान गुरसेवक सिंह ने कहा कि प्रदेश में मनरेगा कर्मचारियों को अलग-अलग जिलों में अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा सेवा नियमों में भी समानता नहीं है। उन्होंने मांग की कि पंजाब स्तर पर सभी मनरेगा कर्मचारियों के लिए एक समान वेतन नीति लागू की जाए और सभी के लिए एक जैसे सर्विस रूल्स बनाए जाएं।
कर्मचारियों ने मांग की कि मनरेगा के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग में मर्ज कर नियमित किया जाए। यूनियन नेताओं का कहना है कि इस संबंध में लंबित फाइल को जल्द आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि कर्मचारियों को स्थायी रोजगार का लाभ मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने पे स्केल, पे प्रोटेक्शन और पंजाब सिविल सर्विस नियमों को लागू करने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे काम का पूरा जिम्मा निभा रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं के मामले में उन्हें असमानता का सामना करना पड़ रहा है।
मनरेगा कर्मचारियों ने यह भी मांग की कि उनका सेवा अनुबंध 58 वर्ष की उम्र तक या योजना लागू रहने तक सुरक्षित किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार अनुबंध खत्म होने का डर उनके भविष्य को असुरक्षित बनाता है। उन्होंने सरकार से नौकरी की स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की।
इसके अलावा यूनियन ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को इनसोर्स करने की मांग भी रखी। नेताओं का कहना है कि इससे विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और कर्मचारियों को बेहतर वेतन तथा सेवा सुविधाएं मिल सकेंगी।
कर्मचारियों ने कहा कि मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस योजना को सफल बनाने में कर्मचारी अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी खुद की स्थिति लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है। उन्होंने सरकार से जल्द बातचीत कर समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान मनरेगा कर्मचारी यूनियन के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और नौकरी की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।





