पंजाब

इंदरजीत सिंह केस में बड़ा मोड़, पूर्व AIG राजजीत सिंह हुंदल गिरफ्तार

Kavita2
24 Sept 2026 12:27 PM IST
इंदरजीत सिंह केस में बड़ा मोड़, पूर्व AIG राजजीत सिंह हुंदल गिरफ्तार
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चंडीगढ़। पंजाब में कथित पुलिस-ड्रग्स गठजोड़ से जुड़े पुराने मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बर्खास्त पूर्व AIG राजजीत सिंह हुंदल को 24 सितंबर 2026 को पंजाब पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने पटियाला में गिरफ्तार किया। यह मामला बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के खिलाफ ड्रग तस्करी, नशीले पदार्थों की बरामदगी में कथित हेरफेर और वसूली के आरोपों की जांच से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आत्मसमर्पण के निर्देश के कुछ दिनों बाद राजजीत की गिरफ्तारी हुई है।

इस पूरे प्रकरण की जड़ें वर्ष 2017 तक जाती हैं। पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उन पर ड्रग तस्करी, बरामद नशीले पदार्थों में कथित हेरफेर और लोगों को ड्रग मामलों में फंसाकर वसूली करने जैसे गंभीर आरोप लगे। बाद में इंदरजीत को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

जांच आगे बढ़ी तो तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। राजजीत तरनतारन और मोगा में वरिष्ठ पुलिस पदों पर रह चुके थे और इंदरजीत उनके अधीन काम कर चुका था। आरोप लगा कि राजजीत ने इंदरजीत की पोस्टिंग और पदोन्नति के लिए सिफारिशें की थीं। इन्हीं आरोपों की पड़ताल के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जुड़े घटनाक्रम के बाद दिसंबर 2017 में तत्कालीन DGP सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT बनाई गई।

SIT ने फरवरी से मई 2018 के बीच तीन रिपोर्ट अदालत में सौंपीं। ये रिपोर्ट कई वर्षों तक सीलबंद रहीं और 2023 में खोली गईं। इनमें राजजीत और इंदरजीत के बीच कथित संबंध, इंदरजीत की पोस्टिंग एवं पदोन्नति और वरिष्ठ अधिकारियों की संभावित भूमिका जैसे पहलुओं की जांच का विवरण था। जांच में राजजीत और उनके परिवार की संपत्तियों में कथित वृद्धि तथा संपत्ति खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत की पड़ताल की सिफारिश भी सामने आई।

इस प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू NDPS मामलों की जांच में कथित गड़बड़ी का भी रहा। पंजाब सरकार के 2023 के रिकॉर्ड में आरोप लगाया गया था कि इंदरजीत से जुड़े मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाकर कथित तौर पर पैसे वसूले गए और कुछ ड्रग तस्करों को फायदा पहुंचाया गया। ये आरोप जांच और कानूनी कार्यवाही का विषय हैं और अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

SIT की रिपोर्ट सामने आने के बाद अप्रैल 2023 में पंजाब सरकार ने राजजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की। उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया और इसके बाद उनके खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ी। STF से जुड़े मामले में उन पर आपराधिक साजिश, रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और वसूली समेत अन्य आरोप लगाए गए। दूसरी ओर विजिलेंस ब्यूरो ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर अलग मामला दर्ज किया।

इसके बाद मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रहा। राजजीत ने गिरफ्तारी से राहत के लिए अदालतों का रुख किया। अक्टूबर 2023 में वह अदालत के निर्देश पर STF जांच में शामिल भी हुए, लेकिन इसी दौरान भ्रष्टाचार मामले में उनकी जमानत से जुड़ी स्थिति बदलने के बाद वह गिरफ्तारी से बाहर रहे। पुलिस और अन्य एजेंसियां लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थीं।

सितंबर 2026 में मामले ने एक बार फिर नया मोड़ लिया। राजजीत के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में उनके आत्मसमर्पण के लिए तैयार होने की जानकारी दी। इसके बाद अदालत के निर्देशों के क्रम में 24 सितंबर को वह पटियाला में पुलिस के सामने आए और ANTF ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब के DGP गौरव यादव ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब पुराने मामले की उन कड़ियों पर पूछताछ कर सकती है, जो लंबे समय से लंबित थीं। पुलिस के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि इंदरजीत सिंह से जुड़े कथित नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और पुलिस तंत्र के भीतर उसे किसी तरह का संरक्षण मिला था या नहीं। जांच में संपत्तियों और आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल पहले से होती रही है।

इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी शुरुआत एक पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई से हुई थी, लेकिन जांच धीरे-धीरे पुलिस विभाग के वरिष्ठ स्तर तक पहुंची। पंजाब सरकार ने 2023 में DGP को अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि जांच केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

राजजीत सिंह की गिरफ्तारी पुराने मामले का अंत नहीं, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण है। उनके खिलाफ लगे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। गिरफ्तारी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

करीब नौ साल पहले इंदरजीत सिंह के खिलाफ शुरू हुई जांच अब फिर सुर्खियों में है। ड्रग तस्करी के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला कथित पुलिस संरक्षण, NDPS मामलों में अनियमितता, वसूली और संपत्तियों की जांच तक पहुंचा। अब राजजीत सिंह हुंदल की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में होने वाली पूछताछ और आगे की अदालती कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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