पंजाब

645 करोड़ के बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा

Kiran
3 Oct 2026 12:32 PM IST
645 करोड़ के बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा
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Chandigarh चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला में ज्वैलर्स को 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक-एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले के आरोपियों द्वारा कथित तौर पर बनाई गई फर्जी संस्थाओं से 95.81 करोड़ रुपये मिले। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ ने 29 सितंबर को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला में ज्वैलर्स और उनके सहयोगियों से संबंधित 14 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के परिणामस्वरूप 4.30 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी और जब्ती हुई और ज्वैलर्स और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों में पड़े लगभग 22 करोड़ रुपये के बैंक शेष को जब्त कर लिया गया। ईडी ने कहा कि तलाशी के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद और जब्त किए गए।
घोटाले में कथित रूप से गबन किया गया सार्वजनिक धन हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन का था। ईडी की जांच फरवरी 2026 में राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ रखे गए विकास और पंचायत विभाग, हरियाणा के बैंक खातों की शेष राशि में विसंगतियां थीं।
जांच से पता चला कि मलिक ज्वैलर्स, केएलजी ग्रुप (केएलजी ज्वेल्स, केएलजी इंफ्रा और केएलजी एंड कंपनी), एम.बी. गोल्ड ट्रेडर्स, मेसर्स शाम ज्वैलर्स और मेसर्स सुंदर ज्वैलर्स को कथित तौर पर रिभव ऋषि द्वारा बनाई गई मध्यस्थ शेल संस्थाओं से क्रमशः लगभग 58 करोड़ रुपये, 26 करोड़ रुपये, 5 करोड़ रुपये, 3.66 करोड़ रुपये और 3.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिन्हें ईडी ने घोटाले के कथित मास्टरमाइंड के रूप में पहचाना है। ज्वैलर्स कथित तौर पर हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के बैंक खातों से उत्पन्न अपराध की आय को वैध बनाने में शामिल थे। अपराध की आय कथित तौर पर ज्वैलर्स के माध्यम से आरोपी आईएएस अधिकारियों और घोटाले में शामिल अन्य सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचाई गई थी।
इस संबंध में, सीबीआई ने पंचकुला की विशेष अदालत के समक्ष तीसरा आरोप पत्र दायर किया है, जिसमें छह हरियाणा-कैडर आईएएस अधिकारियों का नाम शामिल है। बैंक धोखाधड़ी मामले में उनमें पांच सेवारत आईएएस अधिकारी-मोहम्मद शायिन, साकेत कुमार, विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल और आरके सिंह- और एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, प्रदीप कुमार और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इससे पहले, इसी मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग में कथित संलिप्तता के लिए चार आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने जांच के सिलसिले में लगभग 211 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति भी कुर्क, जब्त और फ्रीज कर दी थी।
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